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Showing posts from April, 2020

माथे पर तिलक और उस पर चावल क्यों लगाते हैं लोग ? बड़ा ही मार्मिक रहस्य है

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मस्तिष्क पर रोरी (कुमकुम) का तिलक और चावल लगाने का क्या है रहस्य ? आइए जानें संजय दीक्षित ब्रज की देहरी हाथरस। सनातन के सत्य की ओर बढ़ें के तो धर्म के साथ-साथ विज्ञान के भी दर्शन होंगे। क्योंकि पं.राहुल मिश्र सनातन ही एक मात्र धर्म है। जिसमें विश्व के कल्याण की भावना है और प्राणियों में सद्भावना की कामना है। सनातन में पहले धर्म है। मतलब पालन करना ही है, लेकिन पिछे देखा जाए तो उसका एक बड़ा वैज्ञानिक कारण भी होता है। सनातन धर्म से ही हिन्दू सोच यानी संप्रदाय का प्राकट्य होता है। जिसमें एक प्रमुख प्रथा है पूजन के वक्त मस्तिष्क पर तिलक लगाने की। क्यों आखिर माथे पर तिलक क्यों लगाया जाता है ? इसका सीधा सा उत्तर है कि हमारे धर्म की एक प्रथा है, लेकिन जब इसका विज्ञान से जोड़ कर देखें तो बड़ा ही मार्मिक तथ्य निकल कर सामने आता है। आइए जानते हैं आगे की बात। सनातन (हिन्दू) धर्म में एक नहीं अनेकों प्रथाए जुड़ी हैं और उनका सीधा कांटेक्ट किसी न किसी मानवीय संवेदनाओं से जोड़कर कल्याण का भाव रखा गया है। जिसमें से एक प्रथा माथे पर तिलक लगाए जाने की भी है। हिन्दू धर्म की अनेक परंपराओं में...

आइए जाने चुटिया की करामत

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सफलता चाहिए तो केश (चुटिया) की करामात जाने  -चिंतनी की क्षमताओं को बल प्रदान करती है  आपकी चुटिया - जनेऊ का जरूरी पन आइये जानते हैं क्या है मानना ब्राह्माण यानी (मस्तिष्क) के पीछे जो केश (बाल) बढ़ाने की भरतीय पद्धति है, जिसे हम ‘‘चुटिया’’ कहते हैं दरअसल वह आपके दिमाग को क्षमताएं प्रदान करती है। साथ ही आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमताओं को भी आशातीत बल प्रदान करती है, लेकिन पाश्चात्यता  के बढ़ते प्रभाव और भारतीय सोच, संस्कार, संस्कृति और सभ्यता को पीछे ढकेलने का काम जो पिछले नेतृत्वों ने किया है, नोवल कोरोना वायरस उसी का एक परिणाम है। भारतीय सोच, संस्कार और संस्कृति का मूल जो है वह वैदिकता और आध्यात्मिकता से गुजरता हुआ सीधा विज्ञान को टच करता है। अगर आप आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उन्हें सुसंस्कारवान बनाइये। सिर पर चोटी और धड़ पर जनेऊ होना चाहिए। साथ ही हर घर से प्रातः और सायं गायत्री मंत्र की गूंज होना आरंभ होनी चाहिए। घरों से लेकर प्रतिष्ठानों तक, सड़क से लेकर संसद तक और द्वार से लेकर खलिहानों तक समय-समय पर हवनों के कुंडों में आहुतियां दी जाय तो ...