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Showing posts from July, 2023

नौ में से एक भी प्रकार की भक्ति जिस पर होती है वह मुझे प्रिय है : श्री राम

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नौ में से एक भी प्रकार की भक्ति जिस पर होती है वह मुझे प्रिय है : श्री राम  - वनवास के दौरान माता शबरी को दिया नवधा भक्ति का ज्ञान  भगवान श्री राम ने नौ प्रकार की भक्ति का वर्णन माता सबरी को वनगवन के दौरा दिया है। वैसे नवधा भक्ति को दो युगों में वर्णन मिलता है। प्रथम: *सतयुग में :-* जहाँ, प्रह्लाद ने पिता हिरण्यकशिपु को नवधा भक्ति के विषय में बताया है। जबकि त्रेतायुग में, श्री राम ने माता शबरी को नवधा भक्ति  का ज्ञान दिया है। अर्थात प्रभु प्राप्ति के दो मार्ग है। प्रथम है *माया* माया के माध्यम से जीव कर्म भोग में विचरण कर प्रभु कृपा शुद्ध होता है। जैसे सोना तप कर शुद्ध होता है। जब जीव शुद्धिकरण की ओर चल पड़ता है तो प्रभु कृपा से उसे भक्ति मार्ग का वैभव मिलता है जो सीधे प्रभु मिलन की आस से जोड़ता है। अर्थात यहाँ समझने की बात यह है कि माया कर्मों विचरण करा शुद्ध करती है तो भक्ति मार्ग पर चल कर जीव प्रभु से मिलन कर सकता है। *'नवधा भक्ति'* का अर्थ है 'नौ प्रकार की भक्ति बाबा गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने रामायण (श्रीरामचरितमानस) के अरण्यका...

शबरी के सब्र और भक्ति के भाव पर विभोर हुए श्री राम

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शबरी के सब्र और भक्ति के भाव पर विभोर हुए श्री राम -भक्त के मान को रख बैरों का लगाया रुचि-रुचि भोग  ब्रजद्वार हाथरस। "खुद का मान भले ही चला जाये पर भक्त का मान ना जाने पाये।"  भजन की यह पंक्तियां प्रभु की भक्तवत्सलता का बखान कर रही हैं। क्योंकि वह हर बार अपने भक्तों के मान के लिए ही अवतरित हुए हैं। भक्त प्रह्लाद, नरसिंह  भगत, मीरा आदि के अलाव शबरी माता की भक्ति पर भगवान ने उन्हें वह पद दिया जो अनन्य ऋषि-मुनियों के लिए भी दुर्लभ है।         यह मायने नहीं रखता कि प्रभु स्मरण करने वाला किस जाति और संप्रदाय से है। मायने यह रखता है कि उसकी भक्ति में भाव कैसा है। एक बार की बात है कि जब माता शबरी अपने गुरुदेव मतंग ऋषि के आश्रम के लिए जल भरने गई थी तो........यहाँ यह समझना और स्पष्ट करना आवश्यक है कि 👉🏻  वह जंगलों में रहने वाले अति पिछड़े भील समुदाय से थी और विवाह से पूर्व निरीह पशुओं की बलि देने के विरोध में माता शबरी ने घर-परिवार सब छोड़ दिया था, उनकी सेवा और गुरु भक्ति से प्रसन्न हो ऋषि मतंग ने माता शबरी को अपनी शिष्या स्वीकार ...

चित्रकूट में भगवान विष्णु कामदनाथ व भगवान शिव मत्यगजेंद्र के रूप में आज भी निवास करते हैं

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चित्रकूट में भगवान विष्णु कामदनाथ व भगवान शिव मत्यगजेंद्र के रूप में आज भी निवास करते हैं चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर, तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक करे रघुवीर'। सियाराम मय सब जग जानी, करहुं  प्रणाम जोर जुग पानी। ब्रजद्वार (हाथरस)। ब्रज के द्वार कहे जाने वाली हाथरस नगरी से पिछले करीब डेढ़ दशक से भी ज्यादा की हुई मासिक  ब्रज बरसाना यात्रा के अलावा द्वारिका, हरिद्वार,  चार धाम (ब्रज) आदि के बाद चित्रकूट की इस यात्रा में भी भक्ति और भाव का संगम सर्वोपरि होगा। *यात्रा के दर्शनीय वह 11 स्थल हैं जो बैकुंठ के मार्ग को खोलते हैं* 01•  जानकी कुंड यह वह स्थान है (वह कुंड है) जहाँ माता जानकी स्नान किया करती थी। इस स्थान पर माता जानकी के चरण-चिन्ह भी मौजूद हैं। माता सीता राजा जनक की पुत्री थी इसलिए उन्हें जानकी भी कहा गया है। 02• स्फटिक शिला श्री राम जी के जीवन का यह वह स्थान है जो रामायण में विशेष स्थान रखता है। पौराणिक सत्य तो यह है कि यहाँ इस स्फटिक शिला पर ही बैठ कर सीताराम जी अपना अधिकांश समय बिताते थे। मध्य-प्रदेश के जिला स...