कलाके कमाल को अंजाम दे रहा है रेखा का परिवार
कलाके कमाल को अंजाम दे रहा है रेखा का परिवार - उदयपुर की माटी से आया यह परिवार माटी की मूर्तियों में भर रहा है आस्था के रंग - कला की इस कमाई से भरण-पोषण ही बमुश्किल होता है : रेखा संजय दीक्षित हाथरस। कला का कमाल किसी की डिग्री का मुहताज नहीं होता है। यह पेट की आग ही है जो कला को निखारती, संवारती और दौड़ाती है और इसकी गवाही देता है रेखा का परिवार। हजारों किलोमीटर से ब्रज की देहरी कहे जाने वाली हाथरस नगरी में परिवार के साथ पहले गणेश और अब दुर्गा की मूर्तियों को ऐसे सज और संवार रही है मानो बोलने ही वाली हैं। कला की कद्र भले ही इस जमाने में हो या ना हो, लेकिन कला का कमाल करतब को अंजाम दे रहा है। राजस्थान की राजपूताना माटी से आये रेखा के परिवार ने न जाने कितने घरों में गनपति उत्सव करा दिया और अब शारदीय नवरात्र के नौ दिनों की तैयारी में जुटा है पूरा परिवार। राजस्थान के उदयपुर जिले के गजसम्मा क्षेत्र से आया यह परिवार पिछले कई महा से हाथरस के अलीगढ़ रोड पर पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के सामने टेंट में मिट्टी की बेजान मूर्तियों में जान डाल रहा...