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Showing posts from February, 2022

सर्व कल्याण के लिए कार्य करता है विप्र समाज

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सर्व कल्याण के लिए कार्य करता है विप्र समाज -परशुराम मेला अध्यक्ष व संयोजकों का हुआ कई जगह स्वागत  हाथरस। विप्र समाज सर्व समाज के संरक्षिकत्व के रूप में काम करता है। विप्रों के शिरोमणी भगवान परशुराम ने दुष्टों का संहार किया निर्वलों की रक्षा की। उन्ही की पदशैली को कायम रखने के लिए ब्राह्मण महासभा कार्यरत है।         यह उद्गार भगवान परशुराम मेला अध्यक्ष व संयोजकों ने संयुक्त रूप से अपने स्वागत कार्यक्रम में व्यक्त किये।         श्री ब्राह्मण महासभा रजि. हाथरस के श्री परशुराम मेला के अध्यक्ष शरद कुमार नंदा व  सयोंजकगण  विशाल सारस्वत, राजू कौशिक, आदित्य शर्मा व वंशी पंडित का ब्रजवाला कूंआ स्थित प्रशांत शर्मा के प्रतिष्ठापन पर सभी का उत्तरी ओढ़ाकर व माला पहना कर जोशीला स्वागत किया गया। साथ ही होटल  बीसीसीएल रायल, व्यापारी नेता योगा पंडित के अलाव बैनीगंज, , सादाबाद गेट, सासनी गेट आदि कई स्थानों पर स्वागत किया गया। इस मौके पर मेला संयोजक विशाल सारस्वत को मेला श्री दाऊजी महाराज के में लगने वाले ब्राह्मण समाज के शिविर का प...

880100 वर्ष पहले हुआ था श्रीराम का जन्म, बताता है वैज्ञानिक दृष्टिकोण

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से श्री राम का जन्म आज से 8,80,100 वर्ष पहले हुआ था ब्रजद्वार (हाथरस)। धर्मशास्त्रों में , विशेषतः पौराणिक साहित्य में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एक चतुर्युगी में 43,20,000 वर्ष होते हैं , जिनमें कलियुग के 4,32,000 वर्ष तथा द्वापर के 8,64,000 वर्ष होते हैं । राम का जन्म त्रेता युग में अर्थात द्वापर युग से पहले हुआ था । चूंकि कलियुग का अभी प्रारंभ ही हुआ है ( लगभग 5,500 वर्ष ही बीते हैं ) और राम का जन्म त्रेता के अंत में हुआ तथा अवतार लेकर धरती पर उनके वर्तमान रहने का समय परंपरागत रूप से 11,000 वर्ष माना गया है । [ 15 ] अतः द्वापर युग के 8,64,000 वर्ष + राम की वर्तमानता के 11,000 वर्ष + द्वापर युग के अंत से अबतक बीते 5,100 वर्ष = कुल 8,80,100 वर्ष । अतएव परंपरागत रूप से राम का जन्म आज से लगभग 8,80,100 वर्ष पहले माना जाता है । प्रख्यात मराठी शोधकर्ता विद्वान डॉ ० पद्माकर विष्णु वर्तक ने एक दृष्टि से इस समय को संभाव्य माना है । उनका कहना है कि वाल्मीकीय रामायण में एक स्थल पर विन्ध्याचल तथा हिमालय की ऊंचाई को समान बताया गया है । विन्ध्याचल की ऊंचाई 5,000 फीट ह...

होरी खिलावन आवैंगी ब्रजनारी

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होरी खिलावन आवेंगी ब्रजनारी -मथुरानाथ जी महाराज ने आज राजभोग में खेली फिर होली हाथरस। इन दिनों ठाकुर जी जमकर होली खेल रहे हैं। बतादें कि बसंत पंचमी पर्व से ही ब्रज में ठाकुर जी ब्रज के सभी मंदिरों में होली खेलते है। द्वापर युग से चली आ रही प्रथा आज भी ब्रज में प्रचलित है।          ब्रज की द्वार देहरी रस की नगरी हाथरस के दिल्ली वाला चौक स्थित मंदिर श्री मथुरानाथ जी में नित्य नये होली उत्सव मनाये जा रहे हैं। इन उत्सवों के ही क्रम में आज मथुरानाथ जी के मंदिर में श्री मथुरेशो विजयते, मथुरानाथ जी की जय के जय घोषों के साथ होली उत्सव मनाया गया। इस दिन फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा दर्शन  होरी खेल - राज भोग में नित्य के प्रति समाय  सायं 6 बजे से 7:30 तक होली पद गायन हुआ। जिस में "खिलावन आवेंगी ब्रजनारी" प्रातः जगाते समय गवैगी ब्रजनारी, बन में श्री बल्लभ बाला मिलि खेलें फाग " ( नित्य) " प्रथम यथामति प्रणवहुं श्री वृन्दावन रम्य "( धमार ), होरी हो ब्रजराज दुलारे  (काफी ), तू तौ प्रीत की रीति न जानैं ( टोड़ी)  खेलफाग अनुराग म...

*कन्हैयालाल के 11 वें वार्षिकोत्सव में भक्ति, भाव व समर्पण की त्रिवेणी की वह रही रस धारा

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कन्हैयालाल के 11 वें वार्षिकोत्सव में  भक्ति, भाव व समर्पण की त्रिवेणी की वह रही रस धारा * -15 को फेरी शोभायात्रा व 16 को प्रभात फेरी सप्त परिक्रमा में जम कर थिरके भक्त * हाथरस। * सनातन के जय घोष, भगवा की तरंग और भाव, भक्ति व समर्पण की त्रिवेणी में डूबे भक्तजन ठा.कन्हैयालाल के उत्सव में चले जा रहे थे। मुख से भजनों की तरंग, हाथ में मृदंग, ढोल,मजीरा आदि सप्तरंगी मंदाकनी का मिक्चर उत्सव के आनंद में परमानंद की प्राप्ति करा रहा था।         यह आंखों देखा वर्णन ब्रज के द्वार हाथरस के रुई की मंडी स्थित ठा. कन्हैयालाल जी महाराज के 11 वें प्रभात फेरी उत्सव के मौके पर निकाली गई फेरी शोभायात्रा का है। 15 फरवरी को फेरी निकाली गई फेरी शोभायात्रा से पूर्व  14 को कार्यक्रम की शुरुआत मंगला आरती से हुई। जबकि इसके बाद शाम को सुंदरकांड पाठ में भी जमकर भक्तिरस की बारिश हुई। जबकि 15 मंगला आरती के बाद ठा. कन्हैयालाल जी महाराज का मंत्रोच्चारण के साथ महाअभिषेक पूजन के बाद फेरी शोभायात्रा नगर में भ्रमण के लिए निकली।   ...