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Showing posts from October, 2021

करवा चौथ ब्रत 24 दिन रविवार को :विनोद शास्त्री

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करवा चौथ:-चन्द्र दर्शन रविवार को रात्रि 08:25 पर.. विनोद शास्त्री!  ------------------------------------------ वैदिक सत्य सनातन हिन्दू  धर्म मे अपने पति की दीर्धायु की कामना करना और उसकी सुरक्षा करना सदियो से परम्परा गत कर्तव्य भारतीय नारी सदा से निर्वहन करती चली आयी है वह सदा से ही अपने सुहाग को अक्षुण्ण रखने के लिये पुरूषार्थी भी रही है चाहे उसके लिये कितना  भी वलिदान ही क्यो न देना पडा हो  वे कभी न तो इस कर्तव्य से विचलित हुई और ना ही कभी उसने मुंह मोडा!  चाहे राजा हरिश्चन्द्र की रानी तारामती हो.. या सत्यवान की सावित्री  या अत्रि ऋषि की पत्नी सती अनुसूईया हो !  नारी सदा से ही पवित्रता की प्रतिमूर्ति रही है और आज भी हिन्दू धर्म मे नारी द्वारा अपने सुहाग की दीर्धायु की कामना करने की परम्परा यथावत सदियो से चली आरही है!  श्री कार्त्तवीर्य नक्षत्र ज्योतिष संस्थान्  के संस्थापक आचार्य विनोद शास्त्री के  अनुसार  करवा चौथ पर अपने सुहाग की दीर्धायु का पर्व है जो प्रत्येक भारतीय नारी जिसका निर्वहन करती हुई अपने पति की दीर्धायु ...

बाबा से चिड़ती थी, बाबा ही पहुंचे सहायता को

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"ओ सुनंदा के बाबा | कहाँ हो तुम.. ?" कैनेडियन महिला, सुनंदा मार्कस बाबा जी महाराज की बड़ी भक्त हैं   | यूं तो उनके पति, देवर, ससुर आदि भी बाबा जी के भक्त हैं, पर सुनंदा का विशेष ही तौर पर महाराज जी से लगाव रहा, परंतु एक भारतीय साधु पर इस कदर समर्पित होने के कारण उनकी मां (एक अमेरिकन महिला) उससे तो चिढ़ने ही लगी थी, उससे भी अधिक बाबा महाराज से चिढ़ गई कि उसकी लड़की पर कैसा जादू कर दिया है! इस भारतीय साधु ने। अपने रोष में वह बाबा जी महाराज को गालियां भी देती रही। सब कुछ जानते हुए भी त्रिकालदर्शी बाबाजी उसके इस व्यवहार के प्रति सदा ही निरपेक्ष रहे। (याद तो करती है मेरी, गाली देकर ही सही, कुढ़ कर ही सही)         इसी दौरान सुनंदा की मां विदेश यात्रा पर निकलीं। अन्य स्थानों से होते हुए वह डेनमार्क आ पहुंचीं। इधर उनकी थैली भी सिकुड चुकी थी और अर्थाभाव उन्हें सताने लगा था। साथ में वे बीमार रहने लगी थीं। और हालत बिगड़ते-बिगड़ते एक रात वे अपने होटल के कमरे में अचेतावस्था में जाने लगीं। उनमें इतनी भी शक्ति नहीं रही कि उठकर होटल मैनेजर से इस विषय में सहायता...

सूर्य पुत्री सुवर्चला के पति हैं हनुमान, सूर्य ने पुत्री सुवर्चला की शादी की थी हनुमान से

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सूर्य ने पुत्री सुवर्चला की शादी की थी हनुमान से केवल पाराशर संहिता में हनुमान के विवाह का प्रसंग चार विद्या पाने के लिए किया था हनुमान ने विवाह कहां जाता हैं कि हनुमान जी के उनकी पत्नी के साथ दर्शन करनें के बाद घर में चल रहें पति-पत्नी के बीच के सारे तनाव खत्म हो जातें हैं। आंध्र-प्रदेश के खम्मम जिलें में बना हनुमान जी का यह मंदिर काफी मायनों में खास हैं, यहां हनुमान जी अपनें ब्रह्मचारी रुप में नहीं बल्कि गृहस्थ रुप में अपनी पत्नी सुवर्चला के साथ विराजमान हैं। हनुमान जी के सभी भक्त यहीं मानते आए हैं कि वे बाल ब्रह्मचारी थें और बाल्मीकि, कुम्भ, सहित किसी भी रामायण और रामचरितमानस में बालाजी के इसी रुप का वर्णन मिलता हैं, लेकिन पराशर संहिता में हनुमान जी के विवाह का उल्लेख हैं, इसका सबूत आंध्र-प्रदेश के खम्मम जिलें में बना एक खास मंदिर जहाँ हनुमान जी की शादी का प्रमाण हैं। यह मंदिर याद दिलाता हैं कि रामदूत के उस चरित्र का जब उन्हें विवाह के बंधन में बंधना पड़ा था, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि भगवान हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी नहीं थे, पवन-पुत्र का विवाह भी हुआ था और वो बाल ब्रह्मच...