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Showing posts from August, 2022

कीर्ति की दुलारी वृषभान की प्यारी फिर जन्मेंगी रावल गांव के गर्भ गृह में

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कीर्ति की दुलारी वृषभान की प्यारी फिर जन्मेंगी रावल गांव के गर्भ गृह में -03 सितंबर को छटी तो 04 होगा जन्मोत्सव  -05 को बधाइयों में गूंजेंगे भजनों में शब्द और वाद्यों में यंत्र ब्रजद्वार (हाथरस)। राधा राधा रटत ते सब ब्याधा कट जायें। जी यह सत्य है। आइये इस नाम के प्राकट्य और नाम स्वमिनी के अवतरण कुछ कथा को जानते हैं। रावल गांव स्थित मंदिर श्री राधा रानी जी के सेवायत पुजारी जी के अनुसार, राधा जी का अवतरण गोकुल से करीब आठ किलो मीटर दूर रावल गांव में महा गोप वृषभानु जी महाराज के यहां हुआ था। बताते हैं, की एक पुत्री की प्राप्ति के लिए महाराज भृषभानु की पत्नी रानी कीर्ति प्रति दिन यमुना जी से प्रार्थना किया करती थी। एक दिन रानी कीर्ति सदैव की भांति अपनी सखी और सहेलियों के साथ यमुना स्नान के लिए गई हुई थी तो उन्हें यमुना जी में एक कमल पुष्प दिखा जो काफी प्रकाशवान हो रहा था। उससे निकलने वाली  चमक माहौल को चकाचौंध कर रही थी। कमल पुष्प से निकलने वाले दिव्य प्रकाश के बीच से एक अति सुन्दर और सलौनी बच्ची के उन्हें दर्शन हुए। यह देखकर रानी कीर्ति स्तब्ध और चकित थी। उ...

ललिता और विशाखा सखी चंद्रावलि कौं लूंगी बोल : ललिता जन्मोत्सव

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ललिता सप्तमी-राधाष्टमी आवत हैं, ब्रज में बजत बधाई -03 सितंबर को मनाई जायेगी ललिता सप्तमी ब्रजद्वार (हाथरस)। सखी मंडल की प्रमुख और युगल सरकार की अति प्रिय सखी ललिता जी का 03 सितंबर को जन्मोत्सव है। इस दिन को हम ललिता सप्तमी के नाम से जानते हैं। मथुरा जिले में बरसाना के ऊंचागाव में ललिता अटोर नामक पहाड़ी पर ललिता का भव्य मंदिर है। इस मंदिर की जन्मोत्सव परंपरा के अनुसार 2022 में ललिताजी को हुए 5250 वर्ष होने जा रहे हैं।         यह भक्ति के वैभव का ही प्रकाश है कि सखी मंडल की एक वरिष्ठ सखी यानी ललिता जी का जन्मोत्सव 03 सितंबर, 2022 (भाद्र पद शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि) जिसे ललिता सप्तमी भी कहते हैं, को मनाने जा रहे हैं। यह राधा जी से एक दिन बड़ी थीं। ललिता सखी राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की सबसे प्रिय गोपी थी और ललिता सप्तमी जो जन्माष्टमी से 14 दिन बाद और राधाष्टमी से एक दिन पहले पड़ती है, को जन्मोत्सव मनाया जाता है।  भक्तजन इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी के साथ-साथ ललिता देवी की पूजा करते हैं। अष्ट सखी मंडल को ही अष्टसखियों के रूप ...

शिवखोड़ी जहां शिव जी का घर है

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शिवखोड़ी जहां शिव जी का घर है - भस्मासुर से बचने के लिए शिव जी परिवार सहित रहे थे शिवखोड़ी में - शिवखोड़ी का एक छोर खुलता है अमरनाथ गुफा में - जो शिवखोड़ी आता है वह शिवजी की कृपा पाता है प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। जिस प्रत्यक्ष से हम आपकी मुलाकात कराने जा रहे हैं वही सत्य है। यानी हम बात कर रहे हैं शिव की। क्योंकि शिव ही सत्य है और इस सत्य का एक रुप देखने को मिलता है शिवखोड़ी में।  शिवालिक पर्वत की श्रृंखलाओं में स्थित शिवखोड़ी, जहां प्रकृति-निर्मित शिवलिंग और अन्य दुर्लभ प्रतिमाएं स्थापित हैं। कहा जाता है यह प्राकृतिक गुफ़ा हर शिवभक्त के लिए बहुत मायने रखती हैं। जम्मू-कश्मीर राज्य के जम्मू से कुछ दूरी पर स्थित है रयासी। जहां भगवान शिव का घर कही जानेवाली शिवखोड़ी गुफा स्थित है। इससे जुड़ी सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसी गुफा का दूसरा छोर अमरनाथ गुफा में खुलता है। यही कारण है कि शिवखोड़ी शिव भक्तों की आस्था का केंद्र बिंदु माना जाता है। 🌹आइये जानते इससे जुड़ा वृतांत🌹 वृतांत है ! हजारों पहले पहले सतयुग का। भक्तों से प्रसन्न ह...

बंधन मुक्त कर आनंद की अनुभूति करा मनोवांछित फल प्रदान करती हैं माँ

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बंधन मुक्त कर आनंद की अनुभूति करा मनोवांछित फल प्रदान करती हैं माँ - 15 वे वर्ष की पांच वी यात्रा पहुची मां के दरबार  - इस अवसर पर जमकर भजन-कीर्तन में भक्ति के रस में झूमें भक्त  हाथरस/मथुरा। जिसके यहां संतान सुख नहीं है, जो दीन-हीन है, वैभव संपन्न जीवन का आकांक्षी है, जिसको सत्रुओं से कष्ट है या फिर कार्यों में सफलता नहीं मिलती तो वह ब्रज की कुल देवी बंदी, आनंदी और मनोवांञ्छा देवी की शरण में आता है तो सर्वगुण संपन्नता पाता है।          यह उद्गार पं. योगेश्वर महाशय जी महाराज ने ब्रज की द्वार देहरी से पहुंची ब्रज बरसाना यात्रा मंडल की वर्ष 2022 की पांच यात्रा के मौके पर बतौर मंदिर की महिमा का बखान करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने बताया कि मां बंदी देवी सभी को बंदन मुक्त करती हैं  । अर्थात आपका कोई नहीं बन रहा है शुरू करते कार्य में अड़चने आजाती हैं तो उस भक्त को मां बंदी असफलता के बंदनों से मुक्त कर देती हैं। इन्होंने ही श्री कृष्ण की प्रार्थना पर मां देवकी और बाबा वसुदे को बंदन मुक्त किया था। इसके बाद ही बाबा वसुदेव ने लाला क...