कीर्ति की दुलारी वृषभान की प्यारी फिर जन्मेंगी रावल गांव के गर्भ गृह में
कीर्ति की दुलारी वृषभान की प्यारी फिर जन्मेंगी रावल गांव के गर्भ गृह में -03 सितंबर को छटी तो 04 होगा जन्मोत्सव -05 को बधाइयों में गूंजेंगे भजनों में शब्द और वाद्यों में यंत्र ब्रजद्वार (हाथरस)। राधा राधा रटत ते सब ब्याधा कट जायें। जी यह सत्य है। आइये इस नाम के प्राकट्य और नाम स्वमिनी के अवतरण कुछ कथा को जानते हैं। रावल गांव स्थित मंदिर श्री राधा रानी जी के सेवायत पुजारी जी के अनुसार, राधा जी का अवतरण गोकुल से करीब आठ किलो मीटर दूर रावल गांव में महा गोप वृषभानु जी महाराज के यहां हुआ था। बताते हैं, की एक पुत्री की प्राप्ति के लिए महाराज भृषभानु की पत्नी रानी कीर्ति प्रति दिन यमुना जी से प्रार्थना किया करती थी। एक दिन रानी कीर्ति सदैव की भांति अपनी सखी और सहेलियों के साथ यमुना स्नान के लिए गई हुई थी तो उन्हें यमुना जी में एक कमल पुष्प दिखा जो काफी प्रकाशवान हो रहा था। उससे निकलने वाली चमक माहौल को चकाचौंध कर रही थी। कमल पुष्प से निकलने वाले दिव्य प्रकाश के बीच से एक अति सुन्दर और सलौनी बच्ची के उन्हें दर्शन हुए। यह देखकर रानी कीर्ति स्तब्ध और चकित थी। उ...