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दिवाली पर विवाद क्यों समाधान तो अंदर है

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कब मनयें दिवाली ? - पूजन ही तो करना तो क्यों न दो दिन करें - फिर किस बात का विवाद (हथरस ) ब्रजद्वारा। जब तें रामु ब्याहि घर आए । नित नव मंगल मोद बधाए॥ अर्थात रामजी जब सभी भाइयों सहित विवाह कर अयोध्या लौटे थे तो दियों के प्रकाश से अयोध्या दिव्य प्रकाश में बदल गई थी। भारतीय संस्कृति यानी सनातन का सार है। जब-जब सर्व कल्याण के लिए उत्तम वक्त आता है तो दिवाली पर्व मनाया जाता है। दिवाली का अर्थ है मसलन 'दीपों से सुसज्जित पंक्तियां'। दिवाली  शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है। 'दीप' अर्थात (मिट्टी के दिये में जगमगाती लो) और  'आवली'  अर्थात (पंक्ति बद्ध)। अर्थ है 'दीपक' + 'आवली'। यानी   (पंक्तिबद्ध दियो  में जगमगाती अग्नि की लो)।दीपावली को रोशनी का पर्व भी कहा गया है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अज्ञानता पर ज्ञान, और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। जबकि पुनः अयोध्या फिर एक वार दीपों से जगमगाई थी और वह वक्त था राजा राम जी का 14 वर्ष का वन गमन संपन्न कर अयोध्या लौटने का। अब चूंकि दिवाली पर्व माता लक्ष्मी से भी...