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Showing posts from September, 2021

अवसान के बाद पानी मांगा था बाबा महाराज ने, अब रोज बाबा के लिए पानी रखा जाता है

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अवसान के बाद पानी मांगा था बाबा महाराज ने ब्रजद्वार (हाथरस)। शरीर होने के बाद बाबा महाराज की पत्नी के कानों में आवाज गूंजी कि पानी पिला दे बड़ी जलन हो रही है।           बाबा महाराज के परम भक्त राधारमण त्रिपाठी बताते हैं कि उनको एक भक्त ने बताया कि बाबाजी की महा समाधि का समाचार पाकर मैं तो ग्यारह सितम्बर की रात को ही दादा, राजीदा आदि के साथ वृंदावन को रवाना हो गया था । परन्तु मेरी पत्नी रमा तीनों लड़कों को। खिला-पिला-सुलाकर आँगन में बेचैन टहलती ही रह गईं । न आँसू, न विषाद मन-मानस में केवल एक विचित्र-सा मौन एवं चारो तरफ शांति। तभी साढ़े ग्यारह बजे रात उन्होंने स्पष्ट रूप से महाराज जी की वाणी सुनी, “पानी पिला दे, बड़ी जलन हो रही है। " तभी ही उन्हें ज्ञात हो गया कि महाराज जी द्वारा त्यक्त पार्थिव शरीर को भस्मीभूत कर दिया गया है । हम तो यही सोचते थे कि अन्य संतों की तरह उनके शरीर को भी  पद्मासन में ला भूमिगत कर समाधिस्त किया जायेगा । वाणी सुनकर शीघ्र ही उन्होंने पूजाघर में रखे महाराज जी के चित्र के आगे काँच के एक गिलास में जल भरकर रख दिया...

डॉक्टर और दवा सब हुए फेल तो बाबा महाराज से अरज आई काम, जमकर खाये पूड़ी-पकवान

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अमेरिका लौटती भक्तों को बाबा की अरज ने किया स्वस्थ तो भंडारे में जमकर खाये पूड़ी और पकवान ब्रजद्वार हाथरस। भले ही बाबा दृष्टव्य रूप में न सही, लेकिन भक्तों की भक्ति और बाबा श्री नीब करोरी महाराज की कृपा आज भी भक्तों पर बरसती है। इस का साक्षात प्रमाण हैं बाबा महाराज की दो अमेरिकन महिला भक्त जिनको डॉक्टर से मिली निराशा के बाद भी पूर्ण स्वास्थ्य लाभ ही नहीं मिला बल्कि उन्होंने भंडारे में जमकर लजीज पकवान और मिष्ठान का मनकर के स्वद चखा।         लेफ्टिनेंट गुरुभक्त केहरसिंह की माने तो घटना बड़ी ही रोचक और  समर्पण भाव से भरी हुई है। बताते हैं कैंचीधाम में दो अमेरिकन महिलायें आई थी। जो बाबा महाराज की अनन्य भक्त थी। यह ही नहीं उन्होंने तो अपने नाम भी बदल कर भारतीय शैली में रख लिए थे। एक ने अपना नाम  गंगा तो दूसरी ने जानकी रख लिया था। दोनों ही बड़े मनोयोग से  बाबा महाराज की चर्चायें मुझसे (लेफ्टिनेंट गुरुभक्त केहरसिंह) से सुनती थी और प्रार्थना में भी सम्मिलित होती थीं। कुछ समय बाद उन्हें पेट के रोग की शिकायत हो गईं। हालात यह हो गये कि अमेरिकन...

बाबा महाराज ने अंगूठी के आंकलन निश्चित किया सही समय

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अंगूठी का आंकलन -बाबा महाराज ने जीवन उपरांत अंगूठी दिलाई आश्रम को ब्रजद्वार (हाथरस)। अंगूठी देखकर बाबा श्री नीब करोरी महाराज ने कहा बहुत ही अच्छी अंगूठी है। जब मैंने चाहा कि बाबा जी महाराज को यह अंगूठी उतार कर दे दूं तो उन्होंने रोकते कहा था अभी नहीं। बाबा महाराज के गोलोकवास के उपरांत माँ वैष्णवी जी की प्राणप्रतिष्ठा के वक्त  वह अंगूठी आश्रय को काम आई।         यह वृतांत बड़ा ही मार्मिक है और इस से बाबा महाराज के परम भक्त श्री राधारमण त्रिपाठी ने अवगत कराते हुए बताया कि बाबा महाराज के परम के एक भक्त ने एक बार किसी के कहने पर बताया किउन दिनों मैंने एक अच्छे वजन की सोने की अंगूठी बनवाई थी। साथ ही शुभ दिन देखकर उस अंगूठी को पहन लिया। कुछ ही दिनों में मेरे लिये वह साधारण-सी बात हो गई। कुछ काल बाद महाराज जी हमारे घर पधारे। एकाएक उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया और अंगूठी को देखकर बोले, “ओहो ! तुमने तो बड़ी अच्छी अंगूठी पहनी है।” महाराज जी का यह आचरण मेरी समझ में नहीं आया। पर वे उस अंगूठी को पकड़कर मेरी उंगली में घुमाते रहे कुछ देर तक और बीच-बीच में ...

बाबा से लगाई अरज तो मृत पत्नी में आ गई थी सांसे

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बाबा से लगाई थी डोर तो मृत पत्नी को मिला था जीवन: प्यारेलाल -बरेली की यथार्थ घटना, जानने वालों के लिये था चमत्कार ब्रजद्वार (हाथरस)। पीड़ित के सहारे, बाबा महाराज हमारे। यह गलत नहीं है, बल्कि मेरे स्वयं के अपने अनुभव की बात है (प्यारेलाल गुप्ता, बरेली। गुप्ता जी ने यह घटना 1991 में बाबा महाराज के एक भक्त को बताते हुए बाबा महाराज का एक लंबी सांस लेते हुए स्मरण किया और आगे बताया कि करीब 40 वर्ष पूर्व - मेरी पत्नी बहुत बीमार हो गई थी। बचने की कोई उम्मीद नहीं रह गई थी। मेरे पास एक ही सहारा रह गया था कि केवल बाबा महाराज का निरंतर स्मरण। उसी दरमियान एक बार जब में पत्नी के लिए दवा लेने जा रहा था और मन ही मन बाबा महाराज स्मरण कर रहा था तो रास्ते में किसी से पता चला कि महाराज जी बरेली आए हैं। मैंने दवा खाने में डॉक्टर का नुस्खा (पर्चा)  दिया और कहा कि घर भिजवा देना दवाएं। जबकि खुद मैं डॉक्टर भंडारी के घर भाग लिया। पर जब मैं वहां पहुंचा तो बाबा महाराज नहीं मिले तो  आठ बजे रात तक एक पेड़ के नीचे ही बैठ कर बाबा महाराज का ही स्मरण करता रहा | तब एक व्यक्ति से पता चला कि बाबाजी त...

माँ ने अरज लगाई तो बाबा महाराज मौत के मुंह से निकाल लाये पुत्र को

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मौत के मुंह से निकाला बाबा महाराज ने श्रीमती ग्यानू जी का लड़का ब्रजद्वार (हाथरस)। जय हो बाबा श्री नीब करोरी महाराज की। एक बड़ा ही मार्मिक और श्रद्धापूर्ण प्रसंग है। आप भले ही इस को कोई किस्सा या कहानी समझें, लेकिन जिसके ऊपर बीती थी वह थीं श्रीमती ग्यानू जो उत्तराखंड के शिमला क्षेत्र की रहने वाली थी। उनके लड़के की हालत बहुत ही गंभीर थी।         मेहलोत्रा जी की पुत्री श्रीमती ग्यानु जी बाबा महाराज की बहुत ही समर्पित भक्तों में से थी। एक बार उनका का लड़का एक किसी गंभीर बीमारी ग्रसित हो गया। हालात यह हो गये कि लड़के को शिमला के एक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ग्यानु जी बहुत बैचेन थी और बाबा से उसकी सुरक्षा की प्रार्थना कर रही थीं। परंतु बाबा महाराज तो भ्रमणकारी थे और उनके भ्रमणशील होने के कारण बाबा महाराज से श्रीमती ग्यानूजी का संपर्क नहीं हो पा रहा था। बाबा का पता न जान पाने के कारण वह बहुत ही अशांत थी। जबकि तो भक्त हितकारी थे। उस समय बाबा केहर सिंह जी के साथ कार से वृंदावन से दिल्ली जा रहे थे। रास्ते में वे केहर सिंह जी से बोले, " ग्यानु मेरी बड़ी भक्त है...

पहले दर्शन देकर दूर करे थे कष्ट, अब स्मरण मात्र से हरते है बाबा नीब करोरी महाराज कष्ट

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बाबा नीब करोरी महाराज को 19 सो में हुआ था अवतरण, 1973 हुआ गोलोकवास -शरीर रूप में भी भक्तों के कष्ट हरते थे, अब स्मरण मात्र से करते हैं भक्तों के कष्ट दूर -बाबा महाराज का मुख्य मंदिर नीब करोरी गांव में है, उत्तर-प्रदेश के खिमसेपुर (फर्रुखाबाद) में आता है हाथरस (ब्रजद्वार)। जय बाबा नीबकरोरी महाराज की। बाबा महाराज की प्रेरणा से बाबा महाराज व सनातन धर्म के संबंध सुगम और सरल जानकारियों की यह पहल  शुरू हो रही है। हम उम्मीद करते हैं कि आप अपने पूर्णरूपेण सहयोग के साथ अधिक से अधिक लोगों में प्रचारित और प्रसारित करने सहयोग प्रदान करेंगे। नाम व परिचय:- बाबा महाराज को नीबकरोरी व कुछ भक्त नीमकरौली के नाम से जानते हैं। ऐसा माना जाता है कि बाबा महाराज का जन्म 11 सितंबर 1900 में गांव अकबरपुर जिला फिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश) बताया जाता है। कहा यह भी जाता है बाबा का जन्म  स्थान हिरन गांव से करीब 500 मीटर दूरी पर है। बैसे बाबा महाराज का नाम पं. लक्ष्मीनारायण शर्मा है। नीबकरोरी (नीमकरौली) एक महान संत और दुखियों के दु:ख हर्ता व हनुमान जी परमभक्त के रूप में जाना जाता है। बाबा श्री नीबकरो...