अवसान के बाद पानी मांगा था बाबा महाराज ने, अब रोज बाबा के लिए पानी रखा जाता है
अवसान के बाद पानी मांगा था बाबा महाराज ने ब्रजद्वार (हाथरस)। शरीर होने के बाद बाबा महाराज की पत्नी के कानों में आवाज गूंजी कि पानी पिला दे बड़ी जलन हो रही है। बाबा महाराज के परम भक्त राधारमण त्रिपाठी बताते हैं कि उनको एक भक्त ने बताया कि बाबाजी की महा समाधि का समाचार पाकर मैं तो ग्यारह सितम्बर की रात को ही दादा, राजीदा आदि के साथ वृंदावन को रवाना हो गया था । परन्तु मेरी पत्नी रमा तीनों लड़कों को। खिला-पिला-सुलाकर आँगन में बेचैन टहलती ही रह गईं । न आँसू, न विषाद मन-मानस में केवल एक विचित्र-सा मौन एवं चारो तरफ शांति। तभी साढ़े ग्यारह बजे रात उन्होंने स्पष्ट रूप से महाराज जी की वाणी सुनी, “पानी पिला दे, बड़ी जलन हो रही है। " तभी ही उन्हें ज्ञात हो गया कि महाराज जी द्वारा त्यक्त पार्थिव शरीर को भस्मीभूत कर दिया गया है । हम तो यही सोचते थे कि अन्य संतों की तरह उनके शरीर को भी पद्मासन में ला भूमिगत कर समाधिस्त किया जायेगा । वाणी सुनकर शीघ्र ही उन्होंने पूजाघर में रखे महाराज जी के चित्र के आगे काँच के एक गिलास में जल भरकर रख दिया...