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Showing posts from February, 2021

राधा जी की सबसे छोटी सखी थीं सुदेवी जी, ब्रजद्वार हाथरस के भक्तजन पहुँचे शरण में

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ब्रज बरसाना यात्रा मंडल की चौरासी कोस यात्रा पहुँची सुनहरा गांव, हुआ भजन-कीर्तन ब्रजद्वार हाथरस । प्रथम चौरासी कोस यात्रा के तृतीय चरण में ब्रजद्वार हाथरस से भक्तजन गांव सुनहरा स्थित सुदेवी सखी मंदिर पहुँचे। जहाँ भजन-कीर्तन और फूलों की होली हुई।           21 फरवरी 2021 रविवार बरसाने से पांच किमी दूर सुनहरा गांव पहुँचे। जहाँ पर *नंद गांव कौ कुंवर कन्हैया बरसाने की छोरी खेलें होरी* आदि भक्ति गीतों पर भक्त जमकर झूमें। वहाँ पर मौजूद महाराज जी ने बताया कि सुदेवी राधा जी सबसे छोटी सखी थी। सुदेवी जी इतना अच्छा सितार बजाती थीं कि भगवान कृष्ण ने उन्हें अपनी नित्य लीलाओं में वाम स्थान दिया था।         उन्होंने बताया कि बरसाना को आदि वृंदावन कहा जाता है। अष्ट दल कमल की संकल्पना में कमल के मध्यभाग में राधारानी का स्थान है। कमल के आठ दलों के रूप में उनकी अष्ट सखिया विराजमान हैं। इसी तरह कमल के मध्य भाग में बरसाना है और इसके चारों ओर अष्ट सखियों के गाव मौजूद हैं। राधा की सबसे छोटी और प्रिय सखी सुदेवी का गांव सुनहरा वर्तमान में भरतपु...

अयोध्या में भव्य निर्माण शुरू, अब मथुरा की बारी, ठाकुर जी ने किया युवाओं का आह्वान

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अयोध्या के बाद अब मथुरा के लिये जनजागरण की जरूरत: ठाकुर जी  राजरानी में हुआ विश्व विख्यात कथा वाचक पं. देवकीनन्दन का भव्य स्वागत हाथरस । बड़े संघर्ष, समय और बलिदानों के बाद अयोध्या में श्री राम लाल मंदिर बन रहा है। कौन-कौन चाहता है अयोध्या के बाद मथुरा में भी मंदिर का निर्माण हो ? अभी तो सिलसिला शुरू हुआ है। अब मथुरा के लिये एक बड़े जनजागरण की आवश्यकता है।           यह उद्गार विश्व विख्यात कथा वाचक पं. देवकीनन्दन ठाकुर जी ने राजरानी मेहरा गेस्ट हाउस में ब्रजद्वार हाथरस के सनातनियों के सम्मुख व्यक्त किये। इस स्वागत समारोह में श्री ठाकुर जी ने कहा धर्म तो केवल और केवल "सनातन" ही है। और सब तो मजहब व संप्रदाय हैं। क्योंकि जहाँ सभी के कल्याण के भाव हो वही पर धर्म होता है। सनातन में ही विश्व के कल्याण का नारा दिया जाता है। धर्म सर्वोपरि है, व्यक्ति नहीं  ? जो धर्म के प्रति जागरूक नहीं है वह शव के समान है। जो धर्म की रक्षा के लिए आगे आता है वही हिन्दू है।         उन्होंने युवाओं का आह्वान किया। युवाओं से कहा, "वह बु...

84 कोस यात्रा से मिलता है अश्वमेध का लाभ

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ब्रज के कण-कण में राधाकृष्ण का वास है ब्रजद्वार हाथरस। आइये जानते हैं क्या है 84 कोसी यात्रा? चौरासीय यात्रा/ परिक्रमा व्यक्ति को क्यों करनी चाहिए यह ? परिक्रमा के परिक्रम में जानने का प्रयास करें तो श्री राधाकृष्ण ने जहाँ-जहाँ अपनी लीलायें की हैं वह इन्हीं चौरासी कोस यात्रा के क्षेत्र में आता है। बताया गया है कि इस यात्रा का एक-एक कदम चलना मतलब एक-एक अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर है।            वेद-पुराणों में ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा का बहुत महत्व है, ब्रज भूमि भगवान श्रीकृष्ण एवं उनकी शक्ति राधा रानी की लीला भूमि है। इस परिक्रमा के बारे में वारह पुराण में बताया गया है कि पृथ्वी पर 66 अरब तीर्थ हैं और वे सभी चातुर्मास में ब्रज में आकर निवास करते हैं। करीब 268 किलोमीटर परिक्रमा मार्ग में परिक्रमार्थियों के विश्राम के लिए 25 पड़ावस्थल हैं। इस पूरी परिक्रमा में करीब 1300 के आसपास गांव पड़ते हैं। कृष्ण की लीलाओं से  जुड़ी 1100 सरोवरें, 36 वन-उपवन, पहाड़-पर्वत पड़ते हैं। बालकृष्ण की लीलाओं के साक्षी उन स्थल और देवालयों ...

जहाँ खेली थी राधा संग होली वहां पहुंचे ब्रजद्वार हाथरस के भक्त

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कृष्ण और गोपियों साथ होली के राधा ने किया था गुलाल कुंड में स्नान ब्रजद्वार हाथरस । ब्रज का द्वार कहे जाने वाले नगर हाथरस चौरासी कोसीय यात्रा जब गुलाल पहुंची तो सभी द्वापर युगीय बिरासत ''गुलाल कुंड'' को देख सभी भक्तों ने अपने आपको राधाकृष्ण के साथ होने की अनुभूति महसूस की।            बतादें अनेको धार्मिक पुस्तकों में जिसका वर्णन मिलता है वह ''गुलाल कुंड'' गोवर्धन से डीग मार्ग पर गांव गांठोली में स्थित है। कहते हैं जैसा नाम वैसा ही कुछ गुलाल कुंड का इतिहास भी है। मगर इसको  दुर्भाग्‍य ही कहा जा सकता है कि राधाकृष्ण की द्वापर युगीन होली लीला के इस प्रमाण की ओर गंभीर से नहीं देखा गया तो यह प्रमाण भी अब विलुप्तता की ओर चला जायेगा।            पं. घनश्याम शर्मा बरसाने बाले बताते हैं कि आज भी धार्मिक पुस्तकों में गुलाल कुंड का वर्णन मिलता है। जहाँ राधारानी गोपियों के साथ कान्हा से गुलाल होली खेलने आईंं थी। होली में इतना गुलाल उड़ा था कि आसमान पर रंगों के बादल छा गये थे तो धरा पर रंगीन चादर सी बिछ...

धर्म के मर्म की विशेष तत्व के रूप में माता उर्मिला ने सिद्ध किया है अपने आपको

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धर्म का मर्म हैं माता उर्मिला ब्रजद्वार हाथरस। हम बा धर्म की करते है। धर्म पर बड़े प्राख्यान सुनते और देते हैं। वस्तुतः धर्म का अर्थ तो काफी वृस्तित है, परंतु छोटे रूप में हम यह समझ सकते हैं कि पूर्ण जिम्मेदारी के साथ हम अपने दायित्व को निभायें। धर्म की जब-जब चर्चा होगी तो माता उर्मिला का नाम इस चर्चा में ना आये यह होना उचित नहीं है। क्योंकि धर्म का पालन करते हुए माता उर्मिला ने स्वयं धर्म को सिद्ध किया है। आइये समझने का प्रयास करते हैं।  अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के तीसरे नंबर के पुत्र थे और उनका विवाह सीता जी की छोटी बहन व जनकनंदनी उर्मिला जी के साथ हुआ था। इसका प्रमाण वाल्मीकि रामायण में मिलता है। धर्म का मार्मिक वृतांत 👉 यह है कि  लक्ष्मण के वनवास जाने के बाद उर्मिला के पिता अयोध्या आए और उर्मिला को मायके चलने का अनुरोध करने लगे, ताकि मां और सखियों के सान्निध्य में उर्मिला का पति वियोग का दुःख कुछ कम हो सके। परन्तु उर्मिला ने अपने मायके मिथिला जाने से इनकार करते हुए कहा कि पति की आज्ञा अनुसार पति के परिजनों के साथ रहना और दुख में उनका साथ न छोड़ना ह...

बलराम ने धेनुकासुर संहार कर किया था उद्धार

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तालवन पहुँचे ब्रजद्वार हाथरस के भक्त ताड़ो के वृक्षों सघन स्थान को ही तालवन पड़ा यहाँ का नाम ताड़ के फलों को गिरने की आवाज़ से जागा था धेनुकासुर, बलराम ने किया उद्धार ब्रजद्वार हाथरस। धेनकासुर का वध स्थल को ही आज तालवन के नाम से जाना जाता है 07 फरवरी 2021 रविवार को ब्रजद्वार हाथरस से चौरासी कोस यात्रा पहुँची तो महाराज  जी ने बताया कि यहां पर ताड़ वृक्षों बड़ा ही रमणीक स्थल था।         उन्होंने बताया कि करीब साढ़े पांच हजार साल पहले यहां पर ताड़ के सुंदर पके फलों की सुगंध बलराम और कृष्ण को अपने सखाओं के साथ तालवन में खींच लाई थी। जब ग्वाल-बाल श्रीदामा, सुबल, स्तोक, तेजस्वी को भूख लगी तो उन्होंने खाने के लिए फल तोड़ लिए।  जब फलों के गिरने की आवाज हुई तो वहां सो रहे राक्षस धेनुकासुर की नींद खुल गई। ग्वालों पर जब उसने आक्रमण किया तो बलराम ने उसका वध कर दिया और वहां हल से ताल खोद दिया था। उस ताल से पानी पीकर सखाओं ने प्यास बुझाई थी। 52 बीघा क्षेत्रफल में फैला ये तालवन पिछले कुछ सालों तक आबाद रहा था।  हाईवे से भरतपुर मार्ग पर  ...

छह ग्रहों का योग का योग, हो सकती हैं चौकाने वाली घटायें

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मकर राशि मे छह ग्रहो का होगा मिलन: विनोद शास्त्री!  -------------------------------------------- हमारे सौरमण्डल में अनेको प्रकाश वर्षो  की दूरी पर एक दूसरे से दूरी पर फैले ग्रह  आपस में कभी नहीं  मिलते, परंतु हमारे पृथ्वी से  अंशात्मक दूरी कम होने पर ग्रह निकट  दिखाई देते हैं।  जिनका पूरा प्रभाव हमारे मानव जीवन पर पडता है। श्री कार्त्तवीर्य नक्षत्र ज्योतिष संस्थान के संस्थापक आचार्य विनोद शास्त्री के अनुसार हमारे नौ ग्रह  समस्त सौर मण्डल में अपने पथ पर बारह राशियों में रह कर परिक्रमा करते रहते हैं। परन्तु कभी-कभी  किसी एक राशि में यह ग्रह एकत्रित हो जाते हैं  तो अनेकों अच्छे-बुरे प्रभाव मानव जाति तथा प्रकृति पर डालते है।  कोरोना माहामारी से पूर्व  भी 26 दिसंबर 2019 को ऐसा ही  षड्ग्रही योग वना था।  ऐसा  ही षड्ग्रही योग दिनांक 9 फरवरी को रात्रि 08 बज कर 29  मिनट को बनने जा रहा है। जब चंद्रमा मकर राशि में पूर्व से ही विराजमान पांच ग्रहों जिसमें सूर्य, वुध, गुरू, शुक्र, शनि से मिलेगा।...

ब्रजद्वार के भक्त पहुँचे चौरासी कोस, प्रथम चरण संपन्न

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प्रभात फेरी के साथ चौरासी कोस का प्रथम चरण संपन्न तालवन, कमोदवन के साथ भूतेश्वर व माता कात्यायनी दर्शन भी किये ब्रजद्वारके भक्तों ने यमुना भ्रमण के दौरान भजन-कीर्तन करते ब्रजद्वार के भक्त  ब्रजद्वार हाथरस । प्रभात फेरी से आरंभ हुए चौरासी कोस यात्रा का प्रथम चरण कमोदवन (कुदरवन) में कपिल मुनी व वल्लभाचार्य जी की प्रथम बैठक दर्शन के साथ संपन्न हुआ।         ब्रज बरसाना यात्रा मंडल, हाथरस के तत्वावधान में रविवार 07 फरवरी 2021 को प्रथम चरण का शुभारंभ प्रभात फेरी निकाल गणेश वंदन के साथ हुआ। यात्रा का प्रथम पड़ाव मुरसान स्थित माँ पीपल वाली देवी पर हुआ। जहाँ नारियल फोड़ माँ के पूजन के बाद ब्रजद्वार के भक्त  चैैैतन्य महाप्रभु के पदचिन्ह मंंदिर में भजन करते भक्त मथुरा स्थित विश्राम घाट पहुँचे। इससे पूर्व बरसाना से आये विद्वजनों ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजन संपन्न कराया। इसके बाद सभी ने भगवान  द्वारिकाधीश के दर्शन किये। बाद में प्रभु भूतेश्वर महादेव व माता कात्यायनी के दर्शन किये। बताया जाता है कि यहां पर माता के केश गिरे थे इसलिए यह स्थान श...