वृंदा के रूप में पंकज परिधान का पर्ण निभायेंगे: कोकिल जी महाराज -काका स्मारक के सामने पूजन स्थल पर शिष्य परिकर ने किया कोकिल जी का पूजन
वृंदा के रूप में पंकज परिधान का पर्ण निभायेंगे: कोकिल जी महाराज -काका स्मारक के सामने पूजन स्थल पर शिष्य परिकर ने किया कोकिल जी का पूजन हाथरस। कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जस फल बोया तस फल चाखा। अर्थात कर्म की प्रधानता ही जीवन का सही और सार्थक मार्ग है। अपने कर्म पथ पर जो व्यक्ति लगातार चलता है वह सनातन के सत्य को भी सार्थक सिद्ध करता है। यह उद्गार रामकथा मर्मज्ञ व विख्यात भागवत प्रवक्ता श्री श्री 1008 राम कोकिल जी महाराज ने वृंदा फैशन पर मुख्य आथित्व स्वीकारते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहाँ यह धरा मृत्यलोक के नाम से जानी जाती है। इस धरा मुख्य मुख्य धर्म 'कर्म' ही है। अर्थात देश की रक्षार्थ जो शस्त्र उठाये वह क्षत्रिय 'कर्म' का घोतक वर्ण है, जो सफाई को सार्थक करे वह शूद्र वर्ण का श्रेष्ठा है, जो विश्व कल्याणार्थ शास्त्र का अध्ययन करना और कराना व सर्व हिताय के भाव से धर्म को 'कर्म' के कारण्य में धारता है वह विप्र यानी ब्राह्मण वर्ण को प्रशस्त करता है। इसी प्रकार जो सर्व हित के लिए ...