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Showing posts from October, 2023

वृंदा के रूप में पंकज परिधान का पर्ण निभायेंगे: कोकिल जी महाराज -काका स्मारक के सामने पूजन स्थल पर शिष्य परिकर ने किया कोकिल जी का पूजन

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वृंदा के रूप में पंकज परिधान का पर्ण निभायेंगे: कोकिल जी महाराज  -काका स्मारक के सामने पूजन स्थल पर शिष्य परिकर ने किया कोकिल जी का पूजन  हाथरस। कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जस फल बोया तस फल चाखा। अर्थात कर्म की प्रधानता ही जीवन का सही और सार्थक मार्ग है। अपने कर्म पथ पर जो व्यक्ति लगातार चलता है वह सनातन के सत्य को भी सार्थक सिद्ध करता है।           यह उद्गार रामकथा मर्मज्ञ व विख्यात भागवत प्रवक्ता श्री श्री 1008 राम कोकिल जी महाराज ने वृंदा फैशन पर मुख्य आथित्व स्वीकारते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहाँ यह धरा मृत्यलोक के नाम से जानी जाती है। इस धरा मुख्य मुख्य धर्म  'कर्म' ही है। अर्थात देश की रक्षार्थ जो शस्त्र उठाये वह क्षत्रिय 'कर्म' का घोतक वर्ण है, जो सफाई को सार्थक करे  वह शूद्र वर्ण का श्रेष्ठा है, जो विश्व कल्याणार्थ शास्त्र का अध्ययन करना और कराना व सर्व हिताय के भाव से धर्म को 'कर्म' के कारण्य में धारता है वह विप्र यानी ब्राह्मण वर्ण को प्रशस्त करता है। इसी प्रकार जो सर्व हित के लिए  ...

चंद्रग्रहण रात 01:05 से 02:24 तक, सुतक 28 की सायं 04:05 से

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चन्द्र ग्रहण निर्णय   चंद्रग्रहण के सूतक 28 को सायं 4.05 से: पं. श्याममोहन - 28 की रात 01: 05 से 02:24 तक पड़ेगा चंद्रग्रहण  - सूतक काल भोजन - शयन - स्पर्श आदि नहीं करना चाहिए हाथरस। आगामी आश्विन शुक्ला पूर्णिमा शनिवार दि. 28 अक्तूबर 2023 ई. को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान होगा l यह चंद्रग्रहण भा. स्टैं. टा. के अनुसार मध्यरात्रौपरान्त 01 : 05 मिनट से मध्यरात्रौपरान्त 02 : 24 मिनट तक खंडग्रास चंद्रग्रहण की दक्षिणकोर मामूली रूप से ग्रसित होगी।  इस ग्रहण के सूतक दि. 28 अक्टूबर 2023 ई. शनिवार की शाम को 4 : 05 मिनट से नौ घण्टे पहिले शुरु हो जायेंगे l  सूतक काल में भोजन, शयन और स्पर्श आदि नहीं करना चाहिए, लेकिन रोगी, असक्त, बालक, वृद्ध और असमर्थजनों को कोई प्रतिबन्ध नहीं है l सभी देव स्थानों के पट सायंकालीन दर्शन के लिए बन्द रहेगें l नोट : -   ग्रस्यमाने भवेत्स्नानं ग्रस्ते होमो विधीयते।  मुच्यमाने भवेद् दानं मुक्ते स्नानं विधीयते ।।  अर्थात्‌ ग्रहण शुरु होने से पहले स्नान, ग्रहण के समय हवन, दान करना तथा ग...

राम को आधार बना 'रामाधार' ने लिख दिया हस्तलिखित ग्रंथों का इतिहास

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राम को आधार बना 'रामाधार' ने लिख दिया हस्तलिखित ग्रंथों का इतिहास  - श्रीमद्भागवत महापुराण, श्रीमद् बाल्मीक रामायण सहित तुलसी के एक दर्जन ग्रंथों को भी किया हस्तलिखित  - ब्रजद्वार सनातन परिषद, ब्रज बरसाना मंडल व पांडित्य परिषद ने भी की गदगद सराहना हाथरस। इन्हें द्वापर के वेदव्यास कहें या त्रेता के बाल्मीक या फिर राम चरुणानुरागी गोस्वामी तुलसीदास। क्योंकि इन्होंने श्रीमद्भागवत और रामायण सहित करीब डेढ़ दर्जन से भी ज्यादा ग्रंथों को एक ही कलम से लिख डाला। जिनमें हजारों श्लोक, चौपाई और मंत्रों के अलावा सैकड़ों अध्याय शामिल हैं। ऐसा गृहस्थ में रहकर एक सद्गृहस्त संत की तरह जीवन का निर्वहन कोई 'रामाधार' ही कर सकता है।         जी हाँ ! हम वास्तव में ब्रज की देहरी कहे जाने वाली हाथरस नगरी के रामाधार सिंघल की कर रहे हैं। जिन्हों ने विश्व स्तरीय (वर्ड रिकार्ड)  का कार्य किया है, लेकिन साधुता इतनी कि अपने द्वारा किये इस महान कार्य की चर्चा ही नहीं। हाथरस के वैश्य परिवार में जन्मे 'श्री रामाधार' जी का यह कार्य जब परिजनों ने देखा तो अचंभित रह...

कर्ण को मिला स्वर्ग में सोना तो शुरू हो गये पितृपक्ष

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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 कर्म किये जा फल की इच्छा मत कर 👇👇👇👇👇👇👇 पितृपक्ष:- सनातन का एक अद्भुत सत्य है। आइये इस पर एक गंभीर चर्चा करते हैं। सनातन में हर दिन कोई न कोई पर्व या त्योहार का विधान है। जो कहीं ना कहीं एक संदेश या शिक्षा पर जाकर टिकता है। यहाँ हर कुछ अलौकिक और सब से अलग हटकर है। बस हमको कुछ करना है तो उसका गंभीरतापूर्वक अध्ययन करना है। गंभीर अध्ययन का है एकचित्त होकर 'भाव' और 'समर्पण' के साथ उसका क्रमबद्ध तरीके से समझना। पितृपक्ष का उद्भव:- हमारे अध्ययन के अनुसार राजा कर्ण पितृपक्ष के प्रणेता हैं। उन से संबंधित एक छोटी सी कहानी 👇👇👇👇 राजा कर्ण बहुत ही दयालू और सनातनी थे। बताते हैं,  वह प्रति दिन सवा मन सोना प्रति दिन दान करते थे। जब उनका इस लोक को छोड़कर परलोक गमन का वक्त आया और स्वर्ग में पहुँचने पर उनका स्वागत किया गया। भोजन के लिए जो उनको परोसा गया वह आते ही स्वर्ण (सोने) का हो गया। तो राजा कर्ण ने प्रश्न किया ऐसा क्यों हुआ तो उत्तर मिला आपने सिवाय सोने (स्वर्ण) के और कुछ दान किया ही नहीं ? वह चिंतित हुए और उन्होंने कुछ वक...