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Showing posts from October, 2022

दंडौती परिक्रमा में रही लाला और बाबा की धूम

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गिर्राज की दंडौती परिक्रमा में भजनों की रही गूंज - बरसाना मंडल ने लगाई दंडौती और गाये भजन - सूर्य ग्रहण की निवृत्ति आज, मंगलाचरण के साथ गूंजे आज मंदिरों के घंटे हाथरस। वर्ष के अंतिम सूर्य ग्रहण 2022 के अवसर पर ब्रज बरसाना यात्रा मंडल के संयोजकत्व में गिर्राज की दंडौती परिक्रमा लगाई गई। गोशाला स्थित दंडौती परिक्रमा के दौरान भजन-कीर्तन का आयोजन भी भक्ति के संचार का एक माध्यम रहा।         बतादें कि सनातन के सानिध्य में धर्म और कर्म के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रहे "ब्रज बरसाना यात्र मंडल" के तत्वावधान में बीते 14 वर्ष से ब्रज धाम यात्रा का  अनवरत संचार हो रहा है। बतादें कि यात्रा के संस्थापक व शिक्षाविद मा.कैलाशचंद्र वार्ष्णेय जी ने बरसाना यात्रा का आरंभ लोगों को धर्म से जोड़कर उनके कर्म को शुद्ध कर मुक्ति के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए करीब 14 वर्ष पूर्व किया था। लगातार चलने वाले धर्म-कर्म के कार्यां के तहत बीती शरद पूर्णिमा को अग्रवाल धर्मशाला में रासोत्सव का आयोजन कराया था। जिस में घर-घर से गोपाल जी पधारे थे। इसी के तहत मंगलवार को स...

रघुवंश का कर्ज कैसे उतारेगा भारत?

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*रघुवंश का पूरा भारत ऋणि है ?* -क्योंकि राजा राम रघुवंश में हुए और आज गंगा स्नान भी सभी रघुवंश के कारण ही करते हैं -भागीरथ न होते तो गंगा न होती ब्रजद्वार। कैसे हुआ था माँ गंगा का उद्गम। आइये समझते हैं। विद्वजनों द्वरा डाले गए इस नक्से से माँ गंगा के उद्गम यानी प्रवाह विस्तार को समझसकतेह हैं। पौराणिक  सक्ष्यों को उठाकर देखें तो ऐसा कहा जाता है कि रघुवंश के प्रतापी और तेजस्वी राजाओं में से राजा भागीरथ जी महाराज के कठोर तप से माँ गंगे ने ब्रह्मा जी के कमंडल से निकल कर इस धरा पृथ्वी पर आना स्वीकार किया था, लेकिन माँ गंगा के वेग को पृथ्वी रोक नहीं पाती और पाताल में चली जाती, इसलिए राजा भागीरथ को समझा कर माँ गंगे ने उस बख्तर तो शांत कर दिया, लेकिन राजा भागीरथ ने भी हार नहीं मानी। क्योंकि राजा के पूर्वज और प्रतापी राजा सगर के साठ हाजार पुत्र भस्म पड़े हुऐ थे। राजा सगर के वंश में हर राजा उन पूर्वजों के उद्धानार्थ कठोर तप करते थे, लेकिन सफलता नहीं मिलती थी। *आइये समझते हैं पौराणिक महत्व को* "पौराणिक लेखनी में ही यह वर्णित है कि एक बार ऋषि कपिल मुनि कठोर तप पर थे और...