नालंदा विश्वविद्यालय के दोषी बख्तियार खिलज़ी को धूल चटवाई थी राजापृथु ने
नालंदा विश्वविद्यालय के दोषी बख्तियार खिलज़ी को धूल चटवाई थी असम के राजा पृथु ने ब्रजद्वार, (हाथरस)। भारत की ऐतिहासिक साहित्यिक धरोहर व विश्वप्रसिद्ध शिक्षा भवन नालन्दा विश्वविद्यालय को जला कर नष्ट करने वाले जे हादी बख्तियार खिलज़ी की मौत भी दर्दनाक थी। दरअसल कहानी कुछ यूं है कि सन 1206 ईसवी में कामरूप (असम) में जब नालंदा को जला नर संहार की बात राजा पृथु को मालूम पड़ती है तो वह कसम खाते हैं और कहते हैं की "बख्तियार खिलज़ी तू ज्ञान के मंदिर नालंदा को जलाकर कामरूप (असम) की धरती पर आया है... अगर तू और तेरा एक भी सिपाही ब्रह्मपुत्र को पार कर सका तो मां चंडी (कामातेश्वरी) की सौगंध मैं जीते-जी अग्नि समाधि ले लूंगा"। राजा पृथु और उनकी सेना ने 27 मार्च 1206 को असम की धरती पर एक ऐसी लड़ाई लड़ी जो मानव अस्मिता के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। इस युद्ध में बख्तियार खिलज़ी के आये लड़ाकू 12 हज़ार सेनिकों में से सिर्फ 100 सेनिक ही शेष बचे थे। आज भी गुवाहाटी के पास वो शिलालेख मौजूद हैं जिस पर इस लड़ाई के विषय में लिखा है। उस सम...