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Showing posts from December, 2023

नालंदा विश्वविद्यालय के दोषी बख्तियार खिलज़ी को धूल चटवाई थी राजापृथु ने

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नालंदा विश्वविद्यालय के दोषी बख्तियार खिलज़ी को धूल चटवाई थी असम के राजा पृथु ने ब्रजद्वार, (हाथरस)। भारत की ऐतिहासिक साहित्यिक धरोहर व विश्वप्रसिद्ध शिक्षा भवन नालन्दा विश्वविद्यालय को जला कर नष्ट करने वाले जे हादी  बख्तियार खिलज़ी की मौत भी दर्दनाक थी। दरअसल कहानी कुछ यूं है कि सन 1206 ईसवी में कामरूप (असम) में जब नालंदा को जला नर संहार की बात राजा पृथु को मालूम पड़ती है तो  वह कसम खाते हैं और कहते हैं की "बख्तियार खिलज़ी तू ज्ञान के मंदिर नालंदा को जलाकर  कामरूप (असम) की धरती पर आया है... अगर तू और तेरा एक भी सिपाही ब्रह्मपुत्र को पार कर सका तो मां चंडी (कामातेश्वरी) की सौगंध मैं जीते-जी अग्नि समाधि ले लूंगा"। राजा पृथु और  उनकी सेना ने  27 मार्च 1206 को असम की धरती पर एक ऐसी लड़ाई लड़ी जो मानव  अस्मिता के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। इस युद्ध में बख्तियार खिलज़ी के आये लड़ाकू 12 हज़ार सेनिकों में से सिर्फ 100 सेनिक ही शेष बचे थे।  आज भी गुवाहाटी के पास वो  शिलालेख मौजूद हैं जिस पर इस लड़ाई के विषय में लिखा है।  उस सम...

पंचमुखी श्रृंगार में सुशोभित हुए हनुमान जी- पहली बार हनुमान जी के पंचमुखी स्वरूप देख कर भावविभोर हुए भक्त

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पंचमुखी श्रृंगार में सुशोभित हुए हनुमान जी - पहली बार हनुमान जी के पंचमुखी स्वरूप देख कर भावविभोर हुए भक्त हनुमान जी के पंचमुखी श्रृंगार दर्शन  हाथरस। सनातन में श्रृंगार के सार का समन्वय होता है, लेकिन अब यह प्राय: देखने में बहुत कम आ रहा है। मगर बूटीनाथ मंदिर पर चल रहे वार्षिकोत्सव में हनुमान जी के किये गये पंचमुखी श्रृंगार ने फिर से यह एक बार सिद्ध कर दिया कि सनातन में श्रृंगार का सार है। हनुमान जी के चांदी श्रृंगार  दर्शन          बतादें कि इन दिनों ब्रज की द्वार देहरी के नाम से पहचाने जाने वाली नगरी हाथरस में इन दिनों सादाबाद गेट स्थित बूटीनाथ मंदिर पर वार्षिकोत्सव का आयोजन चल रहा है। जिसमें नित्य प्रति मंगला में मंगलाचरण और प्रसाद वितरण, दोपहर में श्रीमद्भागवत कथा प्रवचन और सायंकाल हरिनाम संकीर्तन का आयोजन हो रहा है। साथ ही हनुमान जी महाराज के नित्य प्रति आलौकिक श्रृंगार के दर्शन भी कराये जा रहे हैं। हनुमान जी के ऊन श्रृंगार  दर्शन          आज जब हनुमान जी महाराज के जब पंचमुखी स्वरू...

त्रेता के राम 22 जनवरी को होंगे प्राण प्रतिष्ठित

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*होंगे प्रकट कृपाला दीनदयाल भक्तन के हितकारी* *त्रेता के राम 22 जनवरी को होंगे प्राण प्रतिष्ठित* जिस दिन का पांच सौ साल से इंतजार था वह 22 जनवरी 2024 दिन सोमवार है। इस दिन भारत के  उत्तर प्रदेश राज्य के अयोध्या (Ayodhya) में भगवान श्रीराम के बने भव्य मंदिर में यानी 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा होगी यानी 22 जनवरी को रामलला (Ramlala) यहाँ विराजमान होंगे।  इस दिन सोमवार पड़ रहा है और कूर्म द्वादशी है (कूर्म अवतरण)। यह द्वादशी तिथि 21 जनवरी 2024 को शाम 07:27 बजे प्रारंभ होकर 22 जनवरी 2024 को शाम 07 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। रामलला 24 जनवरी 2024 को 500 साल बाद अपने स्थायी निवास स्थान में विराजित होंगे। यह बाकई एक महान उत्सव से भी अधिक होगा। +++++++++++++++++++++++++ *क्या है धार्मिक मान्यता ?* विष्‍णु पुराण के मुताबिक भगवान विष्‍णु ने इस दिन कूर्म यानी कछुए का अवतार लिया था, जिस कारण यह द्वादशी भगवान विष्‍णु के कूर्म रूप को समर्पित है। *कृपया आप ध्यान दें 👇🏻* इस दिन विष्‍णु रूप कूर्म की पूजा...

जन्म जयंती पर विशेष: यूपी सरकार ने आरंभ की राजा महेंद्र प्रताप यूनिवर्सिटी

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विदेश में रह कर भी लड़ी थी देश के लिए लड़ाई - राजा महेंद्र प्रताप का वचपन बीता था वृन्दावन में - वचपन का नाम था खड़ग सिंह - हाथरस के कल्याण गढ़ी (ढकपुरा) में आज हैं उनके महलों के अवशेष  महान क्रांतिवीर राजा महेंद्र प्रताप  संजय दीक्षित  हाथरस। देश भक्त, पत्रकार, लेखक, क्रांतिवीर, समाज सुधारक और दानवीर। इन सभी शब्दों को एक शब्द में कहना चाहेंगे तो कह सकते हैं महेन्द्रप्रताप। जी हम बात राजा महेंद्र प्रताप की कर रहे हैं। जो अपनी अपनी देश भक्ति और दानवीरता के चलते आज भी लोगों मन और मस्तिष्क में जीवित हैं और आज के दिन यानी एक दिसंबर 1886 को उनका जन्म हुआ था। राजा सहाब के सम्मान में जारी डाक टिकट          राजा महेंद्र प्रताप भारत के महान स्वधीनता संग्राम सेनानी भी थे वह 'आर्यन पेशवा' के नाम से प्रसिद्ध थे और भारत की अनंतिम सरकार के अध्यक्ष थे। यह सरकार प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान बनी थी और भारत के बाहर से संचालित हुई थी। उन्होने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1940 में जापान में 'भारतीय कार्यकार...