क्या अब नरेंद्र ही तलाशेंगे श्रीलंका में भविष्य का विभीषण
"मत" को मत बिगाड़ना! मतलब श्रीलंका से समझ लो - अब नरेंद्र ही तलाशेंगे श्रीलंका में भविष्य का विभीषण हाथरस। वोट यानी हमारा ''मत'' हमरे राष्ट्र व समाज के आने वाले कल का घोतक होता है। "मत" का शाब्दिक अर्थ है कि मंतव्य अर्थात बहुत मंथन के बाद लिया गया वह निर्णय जो एक समयावधि के लिए अंतिम है। अर्थात हमारा मत पूरे पांच वर्ष के लिए होता है। उसके बाद हमको पुन: मौका मिलता है और समयानुसार हमरा "मत" बदलता या फिर यथावत रहता है। हम जिस को अपना मत देते हैं वह पूरे देश, प्रदेश या फिर एक क्षेत्र विशेष के लिए होता है। "मत" अगर कुशल नेतृत्व पर पहुंच जाता है तो निश्चित ही देश, समाज और क्षेत्र तरक्की की राह पकड़ लेता है। अन्यथा परिणाम उल्टे हो सकते हैं। आइये एक तुलनात्मक अध्ययन करते हैं। भारत में पिछले 72 वर्ष तक लगभग एक ही दल का नेतृत्व रहा, लेकिन पड़ोसी देश चीन या फिर पाकिस्तान पूरे सात दशक परेशानी परोसते रहे। "मत" ने जब करवट ली तो आज हालात यह हैं कि पूरा विश्व भारत की ओर बहुत ही आशान्वित दृष्टिकोण...