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Showing posts from April, 2021

चारधाम यात्रा पर भी कोरोना का दंश

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कोरोना महामारी का असर, मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने चार धाम यात्रा की स्थगित देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देख कर पहले ही अनुमान लगाया जा रहा था कि इस बार चार धाम यात्रा भी स्थगित हो सकती है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इसी को लेकर आज सुबह बड़ी बैठक भी बुलाई । इस बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज मौजूद रहे। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इस बात की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि चार धाम यात्रा को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया है । कपाट खुलने के दौरान संबंधित रावल तीर्थ पुरोहित और पुजारी ही मौजूद रहेंगे। संबंधित जिले और प्रदेश से लेकर प्रदेश के बाहर के लोग भी पूरी तरह से प्रतिबंधित होंगे। विधि विधान के साथ सिर्फ पुजारी और रावल ही कपाट खोलेंगे। यहां हम आपको बता दें कि चार धाम यात्रा स्थगित किए जाने पर कारोबारियों का  उत्साह भी ठंडा पड़ गया है। होटल ढाबों को सजाने संवारने का कार्य नहीं होने से इससे जुड़े कामगार भी मायूस हैं। क्षेत्र में हजारों लोगों की आजीविका यात्रा पर ही टिकी है। ऐसे में यात्रा नहीं चलने से इन लोगों को भविष्य की च...

आज है हनुमान जी का जन्मोत्सव

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आज है हनुमान जन्मोत्सव ब्रजद्वार (हाथरस)। विशेष पूजा करके पाएं हनुमान जी का शुभ आशीष। सनातन (हिंदू) धर्म में हनुमान जन्मोत्सव का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन अपने आराध्य देव हनुमान जी के लिए उपवास भी रखते हैं। पवनपुत्र हनुमान को भगवान शिव का 11वां अवतार माना जाता है। हनुमानजी का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन हुआ था। भक्तों का मंगल करने के लिए प्रभु श्रीराम के भक्त हनुमानजी धरती पर अवतरित हुए थे। इस बार यह तिथि 27 अप्रैल दिन मंगलवार को है। हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की पूजा पाठ करने से शत्रु पर विजय और हर मनोकामना पूरी होती है। आइये जानते हैं कैसे हुआ हनुमानजी का जन्म  हनुमानजी की जन्म कथा इस प्रकार बताई जाती है कि समुद्रमंथन के बाद भगवान शिव ने भगवान विष्णु का मोहिनी रूप देखने की इच्छा प्रकट की थी। जो उन्होने समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और असुरों को दिखाया था। उनकी इच्छा का पालन करते हुए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर लिया। भगवान विष्णु का आकर्षक रूप देखकर शिवजी कामातुर हो गए और उन्होंने अपना वीर्यपात कर दिया। पवनदेव ने शिवजी के वीर्...

भये प्रकट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी

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भीलनी के वेर सुदामा के तंदुल रुचि रुचि भोग लगाये बड़ा ही मार्मिक प्रसंग  👇👇👇👇👇👇👇👇👇 लगाता टकटका कर काफी देर तक उस सुपुरुष को निहारते रहने के बाद बुजुर्ग भीलनी के मुंह से बोल फूटे: "कहो राम! सबरी की डीह ढूंढ़ने में अधिक कष्ट तो नहीं हुआ?" श्रीराम मुस्कुराए: "यहां तो आना ही था मां, कष्ट का क्या मूल्य...?"     *"जानते हो राम! तुम्हारी प्रतीक्षा तब से कर रही हूँ जब तुम जन्में भी नहीं थे।* यह भी नहीं जानती थी कि तुम कौन हो? कैसे दिखते हो? क्यों आओगे मेरे पास..? *बस इतना ज्ञात था कि कोई पुरुषोत्तम आएगा जो मेरी प्रतीक्षा का अंत करेगा..."* श्रीराम ने कहा: *"तभी तो मेरे जन्म के पूर्व ही तय हो चुका था कि राम को सबरी के आश्रम में जाना है।"*      "एक बात बताऊँ प्रभु! *भक्ति के दो भाव होते हैं। पहला मर्कट भाव, और दूसरा मार्जार भाव। बन्दर का बच्चा अपनी पूरी शक्ति लगाकर अपनी माँ का पेट पकड़े रहता है ताकि गिरे न... उसे सबसे अधिक भरोसा माँ पर ही होता है और वह उसे पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। यही भक्ति का भी एक भाव है, जिसमें भक्त अपने ईश्वर...