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Showing posts from January, 2021

3200 से भी अधिक गांवों और शहरों में निकाली जाती हैं प्रभात फेरियां

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55 हजार से अधिक गौवंश की सेवा होती है माता जी गौशाला में 5253 हेक्टेयर भूभाग को संरक्षित किया जा सका बाबा महाराज के संघर्ष से ब्रज द्वार हाथरस ।  खनन का ग्रास बनने जा रहे उन धर्म स्थलों को आज नवयौवन मिला तो उसके पीछे भी बाबा महाराज के संघर्ष के दर्शन होते हैं।          सनातन के सत्य रूपी ब्रज की आज अगर पौराणिकता ब्रज में जीवन है तो इसके पीछे बाबा महाराज का एक बहुत बड़ा संघर्ष है। यह उन दिनों की बात है जब खनन माफिया अपने तुक्ष्य लाभ के लिये पौराणिकता की महान विरासत को नष्ट करने में लगे थे। उन दिनों ब्रज के धार्मिक महत्व के पर्वतों का जम कर खनन कार्य हो रहा था। जिससे कृष्ण कालीन स्थलियाँ लुप्त हो रही थीं। बाबा महाराज ने इन्हें बचाने के लिए अपना अदम्य संघर्ष आरंभ किया। यह कोई मामूली संघर्ष नहीं था। बहुत कड़े संघर्ष के बाद 5253 हेक्टेयर भू भाग को आरक्षित घोषित कराया जा सका।        बाबा महाराज ने राधाकृष्ण की प्रिय गऊ माता के लिये भी प्रयास जारी रगे। ब्रज में गायों की दुर्दशा को देखकर बाबा महाराज के प्रयासों से ही ...

बाबा महाराज के संघर्ष ने दिया ब्रज को फिर से पौराणिक स्वरूप

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विलुप्त हो चुके कुंडों और धर्म स्थलों ने पाया आज नव यौवन -बाबा महाराज के संघर्ष के दर्शन होते  हैं इन कुंडों और धर्म स्थलों में ब्रज द्वार हाथरस । मान गढ़ पर्वत के बाद गहवरवन से शुरू हुआ सिलसिला ब्रज के अनगिनत जर्जर लुप्त हुए धर्मस्थलों को कब्जा मुक्त कराते हुए गहवरवन के साथ-साथ अनेक वन-उपवनों, कुंडों को उनका अपना पौराणिक महत्व और पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है बाबा महाराज ने।         मान गढ़ पर्वत के बाद बाबा महाराज ने गहवरवन के अनगिनत ऐसे स्थानों को जो अपना पौराणिक महत्व ही पूरी तरह धूंधला कर चुके थे,  के प्रति कार्य करना आरंभ किया। भले ही उस वक्त उनको यह पता नहीं था कि वह इस कार्य को कर पायेंगे या नहीं, लेकिन उन्होंने अपना कार्य आरंभ कर दिया था और परिणाम आज आपके सामने है कि  उनकी वजह से ब्रज के अनगिनत दुर्लभ प्राय: लुप्ती के कगार पर पहुँच चुके धर्म स्थलियाँ प्रकाश में आए। बाबा महाराज मान मन्दिर में भजन करते और लाड़लीजी मन्दिर में आकर आरतियों में हिस्सा लेते। वाद्य यंत्र बजाते हरि कीर्तन करते। बता दे कि उस वक्त बरसाना का प्रसि...

अधर्म को धर्म और भक्ति रस से सींच भक्ति की खेती खड़ी की बाबा महाराज ने

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डाकुओं की शरणस्थली रहे ब्रह्मांचल पर्वत को फिर से बनाया भक्ति प्रबोधिनी -बाबा महाराज की पहल से आज मान गढ़ पर्वत पर डाकुओं की ललकार नहीं राधे नाम का होता है उच्चारण ब्रज द्वार हाथरस । भक्ति में वह शक्ति होती है कि दुर्जन व दुष्ट स्वत: ही दूर हो जाते हैं। बाबा महाराज ने अपने जीवन में यह सिद्ध करके भी दिखा दिया। क्योंकि ब्रह्मांचल पर्वत   धीरे-धीरे डाकुओं की शरणस्थली से पुनः भक्ति प्रबोधिनी बन गया और आज इसका जीता जागता प्रमाण है मान गढ़ पर्वत।         इतिहास के पन्नों को पलटेंगे तो  बरसाना के ब्रह्मांचल पर्वत को डाकुओं के डकत्य का स्थान पायेंगे, लेकिन आज वहां राधा नाम गूंजता है। क्योंकि पहले वहां पर (ब्रह्मांचल पर्वत) ख़ास कर मान गढ़ उन दिनों डाकुओं की शरणस्थली यानी डाकुओं के छुपने का स्थान होता था। उन दिनों जहान डाकू का बड़ा खौफ था।  राजस्थान, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में उसका आतंक था। कहते हैं कि मान गढ़ पर उसके छुपने का ठिकाना बनाया था। बताते हैं कि बाबा ने प्रभु आराधना के लिए मान गढ़ को ही चुना। उस स्थान पर धार्मिक गतिविधियों के...

पुत्र कामेष्टि यज्ञ के बाद अवतरित हुए बाबा महाराज

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रामेश्वरम में पुत्र कामेष्टि के बाद हुआ था बाबा महाराज का जन्म -तीर्थराज में जन्में बालक ने ब्रज में जगाया राधा भक्ति का अलख ब्रज द्वार हाथरस । जब-जब ब्रज में  राधाकृष्ण की भक्ति की चर्चा होगी तो  कहीं न कहीं विरक्त संत के रूप में बाबा महाराज का नाम अवश्य आयेगा।           जी हां! हम बात यमुना मिशन  और ब्रज पर्यावरण के पुरोधा रमेश बाबा जी महाराज की कर रहे हैं। यहाँ  तक उनके भक्ति मार्ग की बात करें तो उन पर जन्म से ब्रज-रमण भक्ति की कृपा थी या यूं कहें कि उनका जन्म ही भक्ति मार्ग मार्ग पर चलते हुए लोगों को उससे (भक्ति) जोड़ ने के लिए हुआ है तो गलत नहीं होगा।          दरअसल जहाँ तक साक्ष्य मिला है तो बाबा महाराज का जन्म तीर्थराज प्रयाग में हुआ है। जानकारी के अनुसार विख्यात ज्योतिषाचार्य बलदेव प्रसाद शुक्ल के घर जन्मे बालक का ही नाम रमेश बाबा है। बाबा महाराज की माताजी का नाम हेमेश्वरी देवी था। इस दंपत्ति (बलदेव-हेमेश्वरी) ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से रामेश्वरम में पुत्र कामेष्टि यज्ञ किया था। तब ज...

ब्रज वसुंधरा के विरक्ति संत के संघर्ष ने दिया है पौराणिक इतिहास को सुरक्षा

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ब्रज वसुंधरा के पर्यावरण संरक्षक हैं बाबा जी महाराज -रमेश बाबा ने यमुना मिशन के साथ-साथ कुंडों और वन उपवनों के पौराणिक महत्व को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ब्रज द्वार हाथरस । ब्रज वसुंधरा की पर्यावरण सुरक्षा या फिर यमुना मिशन की बात आयेगी तो ब्रज के पर्यावरण पुरोधा रमेश बाबा का नाम प्रथम पंगति में आता है।         'ब्रज के विरक्त सन्त' कहे जाने बाले बाबा जी महाराज एक ऐसी विभूतियों में से हैं, जिन्होंने प्रभु (राधेकृष्ण) की भक्ति करते हुए ब्रज के पर्यावरण की रक्षा के लिए एक  आंदोलनकारी की भूमिका निभाई। बाबा जी महाराज (रमेश बाबा) ने राधाकृष्ण की अति प्रिय गौ माता की रक्षा के अलावा, यमुना जी की साफ-सफाई के लिए यमुना मिशन और वन-उपवन के अलावा ब्रज की  पर्वत श्रृंखला सुरक्षा और संरक्षा के लिये एक महत्वपूर्ण पहल की है। बाबा जी  महाराज की ही पहल का परिणाम है कि आज वह स्थान जो विलुप्ति की कगार पर थे, सभी के दर्शनार्थ उपलब्ध हैं। यह भी कहा जा सकता है कि बाबा जी महाराज की ही पहल है कि ब्रज के पौराणिक स्वरूप को वापस...

प्रारब्ध तीन प्रकार के होते है, जिनसे प्रभु नाम से निवृती मिलती है

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" प्रारब्ध" प्राणियों को भोगने ही पड़ते है : पं. श्याम मोहन शाडिल्य ब्रज द्वार हाथरस ।एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था। धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे में ही पड़ा रहता था।      जब भी उसे शौच, स्नान आदि के लिये जाना होता था; वह अपने बेटों को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे। धीरे-धीरे कुछ दिन बाद बेटे को कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी-कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे। इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे।     अगे बुढ़ापा ने और ज्यादा असर दिखाने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा था, एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बड़े ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है। अब ये रोज का नियम हो गया। एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नहीं आते थे। लेकिन ये  तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बड़े कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है।     एक रात व...

कन्हैया की लगी अंगीठी, गरीबों को बंटे कंबल

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कन्हैया की लगी अंगीठी और गरीबों को बंटे कंबल -कन्हैया की प्रभात फेरी निकाल किया भजन-कीर्तन गर गरीबों को कंबल देते सभासद  पवन कुमार गुप्ता  वैद्य सेवा आयत  योगेश मिश्र  आदि हाथरस ।  बढ़ती शीतलहर के  चलते ब्रज की द्वारदेहरी रस की नगरी हाथरस के रूई की मंडी स्थित मंदिर ठाकुर श्री कन्हैयालाल जी महाराज में अंगीठी लगाई गई और गरीबों को कंबलों का वितरण किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रुप में मंदिर सेवायत पं.योगेश मिश्र (पप्पू पंडित) मौजूद रहे। जबकि कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय सभासद पवन कुमार गुप्ता ने किया।  बेरोजगारी के लिए करारा जवाब है हर्बल धारा बिजनेस जिसमें न पैसा लगाने की जरूरत है ना कोई रिस्क है और ना ही कोई झंझट आपके लिए खुशियों का दौर लाया है और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेरोजगारी का अंत आपके घर परिवार में हर चेहरे पर होगी मुस्कान और खुशी का आनंद +++++++++++++++++++++++++++++++++++           03 जनवरी 2021 रविवार को ठा.कन्हैयालाल मंदिर में ठाकुर जी की अंगीठी लगाई गई।  कार्यक्रम का शुभारंभ मंगला...

जहाँ मानव की पहुँच ही नहीं तो कैसे बनी यह मूर्तियां

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सनातन के सत्य को शिद्ध किया एक विदेशी ने जहाँ मानव की पहुँच ही नहीं तो किस ने बनाई मूर्तियां ब्रज का द्वार हाथरस । इसी जीवन में  करने है स्वर्ग के दर्शन तो आइये करते  एक विदेशी की पहल से सनातन के सत्य यानी प्रभु के दर्शन। 🙏         हिन्दू मान्यता की माने तो कैलाश पल भगवान आशुतोष (शिव शंकर) का निवास है। अर्थात सनातन धर्म के अनुसार, कैलाश मानसरोवर पर्वत को भगवान शिवजी का निवास स्थान माना जाता है,लेकिन आज तक  मानवीय पहुँच कैलाश मानसरोवर  पर्वत के शीर्ष तक नहीं बना सकी है।         अगर ऑनलाइन मिली जानकारी पर विश्वास करें तो एक विदेशी ने पहली पहली बार कैलाश मानसरोवर का वीडियो बनाया है, लेकिन उसने भी "गूगल अर्थ" के माध्यम से ऐसा किया है। इस वीडियो को देखें तो बहुत ही  अविश्वसनीय और विचित्र दृश्य देखने को मिलते हैं। उसका विवरण सुन कर आप आश्चर्यचकित रह जायेंगे।           क्योंकि इस विदेशी प्रवक्ता ने विडियो में बताया है कि विश्व में अभी तक किसी को भी नहीं पता...