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Showing posts from March, 2023

कृष्ण की पटरानी, यम व शनिदेव की बहन का जन्मोत्सव

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कृष्ण की पटरानी, यम व शनि की बहन के जन्मोत्सव की जय -आजके दिन यमुना स्नान न हो सके तो जल में कले तिल डाल कर करें स्नान  दीपावली के बाद भाईदूज को यमुना स्नान का विशेष महत्व  ब्रज द्वार (हाथरस)। जिनके विषय में हम बात कर रहे हैं वह भगवान श्रीकृष्ण की पटरानियों में से एक हैं। जिनका हम कल यानी 27 मार्च 23 सोमवार को जन्मोत्सव मनाने जा रहे हैं। इनके एक भ्राता यमराज हैं तो दूसरे दंड के देवता श्री शनिदेव हैं। जबकि पूरे जगत को जो प्रकाशित करते हैं ऐसे सूर्यदेव उनके पिता हैं। बताते हैं, स्वयं यमदूतों को टारनहारी माँ यमुना जी चैत्रीय शुक्लपक्ष की छट को इस धरा पर अवतरित हुई थी। द्वापर युग की फिर से एक बार यमुना जन्मोत्सव पर फुहार उड़ेगी और पूरे ब्रज में 23 मार्च को यमुना जन्मोत्सव मनाया जायेगा।         *यमुना यमदूतन टारत हैं, भव तारत हैं श्री राधिका रानी।* विद्वजन कहते हैं कि यमुना मैया की उपासना से मृत्यु के उपरांत यमदूतों का भय सर्वथा खत्म हो जाता है। जबकि माँ राधेरानी की भक्ति करने वाला भवसागर से पार हो बैकुंठ का अधिकारी हो जाता है। धर्मग्रंथो...

शरीर के लिए तप करते है और प्राप्ति पर शरीर को वासनाओं में नष्ट कर देते हैं

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उसने जिसको (शरीर को) कमाई के लिए दिया उसका तो ख्याल है, लेकिन यह भूल गये कि उससे (शरीर से) कमाई कितनी की ? अर्थात प्रभु हमें चौरासी लाख योनियों में भ्रमण के बाद मानव रूपी शरीर प्रदान करते हैं, लेकिन हम हैं कि शरीर की सुरक्षा, शरीर को आराम, शरीर को हर सुविधा पहुंचाने में तो लगे रहते हैं, लेकिन संसार के इस माया जाल में पड़ कर हम यह भूल जाते हैं कि शरीर तो हमें भजन करने के लिए मिला है। जो एक दिन पंचतत्व में विलीन होना है। बृजद्वार। शरीर है तो संसार है। संसार है तो सुविधायें भी हैं। उन सुविधाओं को पाने के लिए हम वह भूल जाते हैं जिसके लिए हमको यह शरीर मिला है। दरअसल यह शरीर हमको मोक्ष की प्राप्ति या बैकुंठ के लाभ के लिए हमारे ही कर्म चक्र और प्रभु कृपा की से मिलता है। जिसका मुख्य उद्देश्य प्रभु का भजन-कीर्तन और सत्कर्म करना होता है। क्योंकि बिना शरीर के यह सब संभव नहीं है। शरीर होगा तभी हम यह सब कर सकते हैं। इस शरीर के मिलने से पूर्व हम यह वायद करते हैं कि हे प्रभु! हम तुझे ही भजेंगे। तेरे को भजने के सिवाय हम और कुछ नहीं करेंगे। शरीर चूंकि प्रभु प्राप्ति का प्रमुख माध्यम है और इ...

आलौकिक गर्भगृह में बिराजेंगे मान बिहारी : रमेश बाबा

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आलौकिक गर्भगृह में बिराजेंगे मान बिहारीलाल: रमेश बाबा -भव्यता और अद्भुतता के दायरे में दिखाई देगा मान मंदिर -रमेश बाबा ने मान मंदिर जीर्णोद्धार के लिए किया शिलान्यास, -करोड़ की लागात से निर्माण का अनुमान, संगमरमर और लाल पत्थरों से बनेगा मंदिर -बृज बरसाना मंडल, हाथरस ने मनाया हर्ष  बृजद्वार। जानकारी मिली है मन को प्रफुल्लित कर देने वाली है। जानकारी है कि अब मानबिहारी लाल अपने दिव्य सिंहासन और अद्भुत गर्भगृह में बिराजेंगे। यह ही नहीं मंदिर व मंदिर परिसर भी आलौकिकता की झलक से जकजोर होगा। इसके लिए विरक्त संत बाबा रमेश महाराज ने पूजन-अर्चन के साथ कार्य को अग्रसारित भी कर दिया है। जानकारी के बाद बृज बरसाना यात्रा मंडल, हाथरस ने प्रसन्नता में जमकर अबीर और गुलाल उड़ा कर विश्व कल्याण के सनातनी नारों का जय घोष किया।          जानकारी के आधार को अगर बल दें तो जानकारी बरसाने के गहवरवन स्थित बृजभूमि से है। बतादें, राधा रानी की क्रीड़ा भूमि रहा ब्रह्माचल पर्वत पर मानगढ़ के शिखर पर बना प्राचीन मान मंदिर को अब नए व दिव्य और भव्य रूप प्रदान करने के उद...