राधा जी के दादा थे महिभानु जी महाराज, यह लोग थे परिवार में
श्री राधा जी के दादा थे महिभानुजी और दादी थी सुखदा -परिवार और ननिहाल में थे यह संबंधी ब्रजद्वार। श्री राधा नाम की महिमा को या दोहा में बहुतई मार्मिक ढंग सों व्यक्त कियो गयो है। 'राधा राधा रटत ही सब व्याधा कट जाय। कोटि जन्म की आपदा नाम लेत मिट जाय।।'' राधा स्वयं कृष्ण प्रेम की पराकाष्टा है। अर्थात जो कृष्ण नाम से न होवे वह राधा नाम रटन से हेजावे है। श्री राधिका रानी का प्राकट्य ब्रज के रावल गांव में एक कमल पुष्प पर भयो हो। माँ कीर्ति जी जब यमुना स्नान कों गई हती तौ उन्हे एक पुष्प पर अपार प्रकास्य की अनुभूति भाई ही। पास जाकर देखो तो एक अतीव सुंदरी बच्ची के दर्शन भये। भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय राधारानी का जन्मदिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाते हैं। इस दिन को राधाष्टमी के रूप में मनाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद 15वें दिन राधाष्टमी का उत्सव मनाया जाता है। इस वर्ष राधाष्टमी 23 सितंबर 2023 दिन शनिवार को मनाया जायेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधा जी श्रीकृष्ण से 11 माह बड़ी थीं। राधा...