दिवाली पर विवाद क्यों समाधान तो अंदर है

कब मनयें दिवाली ?
- पूजन ही तो करना तो क्यों न दो दिन करें
- फिर किस बात का विवाद
(हथरस ) ब्रजद्वारा। जब तें रामु ब्याहि घर आए । नित नव मंगल मोद बधाए॥ अर्थात रामजी जब सभी भाइयों सहित विवाह कर अयोध्या लौटे थे तो दियों के प्रकाश से अयोध्या दिव्य प्रकाश में बदल गई थी। भारतीय संस्कृति यानी सनातन का सार है। जब-जब सर्व कल्याण के लिए उत्तम वक्त आता है तो दिवाली पर्व मनाया जाता है। दिवाली का अर्थ है मसलन 'दीपों से सुसज्जित पंक्तियां'। दिवाली  शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है। 'दीप' अर्थात (मिट्टी के दिये में जगमगाती लो) और  'आवली'  अर्थात (पंक्ति बद्ध)। अर्थ है 'दीपक' + 'आवली'। यानी   (पंक्तिबद्ध दियो  में जगमगाती अग्नि की लो)।दीपावली को रोशनी का पर्व भी कहा गया है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अज्ञानता पर ज्ञान, और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
जबकि पुनः अयोध्या फिर एक वार दीपों से जगमगाई थी और वह वक्त था राजा राम जी का 14 वर्ष का वन गमन संपन्न कर अयोध्या लौटने का। अब चूंकि दिवाली पर्व माता लक्ष्मी से भी संबंधित है। क्योंकि समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी का अवतरण की मान्यता भी इसी पर्व से है। इसलिए ही दिवाली पर माता लक्ष्मी का पूजन होता है। विद्वानों की माने तो लक्ष्मी जी का स्वभाव चंचल है और इस चंचलता को साधने के लिए ही विद्या की देवी माता शरदे (सरस्वती) और बुद्धि के दाता श्री  गणेश का पूजन भी आवश्यक है और पूजन किसी भी देवता का सर्वदा लाभप्रद होता है। 
*दिवाली 31 अक्तूबर 2024 को या फिर 01 नवंबर 2024 को*
यहां प्रश्न यह है कि दिवाली 31 अक्तूबर को या फिर  01 नवंबर को मनायें ? इस प्रश्न का सटीक उत्तर सिर्फ एक ही है कि हर बार हम दिवाली एक दिन की मनाते थे, लेकिन इस बार सभी को दो दिन यह अवसर प्राप्त हो रह है। क्योंकि तार्किक विवाद यह है कि दिवाली पर्व
 प्रदोष में मनाया जाता है और प्रदोष के साथ-साथ हमको संकेत दोनों दिन यानी 31 व 01 दोनों में प्राप्त हो रहे हैं। पूजन करना तो अच्छी बात है तो क्यों ना हम दोनों दिन पूजन करें। नहीं दीपमालिका तो कई दिनों तक होती है। अगर देखा जाय तो दिवाली पर्त वंच दिवसीय होता है धनतेरस, रूपचकर्दशी, दिवाली पूजन, गोबर्धन पूजन और भैया दौज सभी में दीपमालिका होती है। तो यह हमारा सौभाग्य होगा कि दिवली पूजन इस बार एक दिन नहीं वल्कि दो दिन मिल रहा है। इसलिए विवाद में न पड़ कर इसका लाभ उठाये और 31 अक्तूबर व  01 नवंबर दोनों दिन पूजन करें कोई दिन खाली नहीं जाना चाहिए। जय श्री राधे।
*इस वार पांच दिवसीय दिवाली उत्सव*

श्री धनतेरस, कुबेर पूजन 29 अक्तुबर, 24 मंगलवार को।
श्री रूपचतुर्दशी व हनुमज्जयन्ती 30  अक्तूबर, 24 बुधवार की।
दीपावली लक्ष्मी पूजन 31 अक्तूबर, 24 बृहस्पतिवार व 
 01 नवंबर, 24  शुक्रवार को।
अन्नकूट व गोवर्धन पूजा 02 नवंबर, 24 शनिवार को तथा 
भैयादौज व यमुना स्नान (यमदुतिया) का पर्व  03 नवंबर, 24 रविवार को मनाया जायगा। जय श्री राधे जय, श्रीकृष्णा, श्री गोवर्धन नाथ की जय।

लेखक 
संजय केशव दीक्षित

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