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ऐसे रहे स्वस्थ

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ब्रजद्वार (हाथरस)  ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~     . *श्री कार्त्तवीर्य आरोग्य मन्त्र* ******************************** 💪💪💪💪💪💪💪💪💪 ******************************** *श्री कार्त्तवीर्य अर्जुन के मन्त्रो का जाप कर स्वास्थ्य लाभ करें!* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 👉वर्तमान मे महामारी काल मे  अपने  आराध्य राजराजेश्वर भगबान् श्री कार्त्तवीर्य सहस्रार्जुन जी से  प्रार्थना करें कि वह भारत वर्ष सहित विश्व मे फैली  वीमारी से मुक्ति दिलायें!  सत्य सनातन वैदिक हिन्दू धर्म मे ऐसी  मान्यता  है कि यदि आप अपने  *आराध्य भगबान् कार्त्तवीर्य सहस्रार्जुन जी* से प्रार्थना 🙏करते है ,  ध्यान करते हैं,  दीपदान. 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 करते हैं  , वन्दना करते हैं, मन्त्र (विचार) जाप📿 कर वार-वार कर प्रार्थना 👏करते है  तो  परमेश्वर 🛕(भगवान्) भी प्रसन्न होकर या ✋🤚दया कर आपको आरोग्य💪 (स्वास्थ्य) प्रदान कर सकते हैं!  *मन्त्र:-* *कार्त्तवीर्यार्जुनाम  राजावाहु सहस्रवान् !* *तस्य स्मरण मांत्रेण,  गतं - नष्टं आरोग्...

रावल में प्रकटी श्री राधे बरसाना किशोरी धाम

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*रावल प्राकट्य स्थल तो बरसाना किशोरी धाम* *-अष्टमी को प्रकटी थीं राधे तो अष्टमी को ही जन्मे थे श्रीकृष्ण* *ब्रजद्वार (हाथरस)।* रावल जी में  गर्भगृह, बरसाना किशोरी धाम। मथुरा जी में जन्मे कन्हैया जय हो नंद के धाम। कृर्ष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था तो राधे ने रावल गांव में अवतरण लिया था। आइये मिली जानकारी के अनुसार करते है कुछ चर्चा।           ऐसा कहा जाता है कि राधा जी बरसाने की थीं, लेकिन पौराणिक साक्ष्य और विद्वजनों की पुष्टि के अनुसार राधा जी का प्राकट्य बरसाना धाम से 50 किलोमीटर दूर रावल जी में हुआ था। आज भी यह गांव रावल के नाम प्रसिद्ध है। ऐसा वृतांत है कि रावल गांव से गुजरने वाली यमुना जी में कमल के पुष्प के साथ माँ राधिकारानी का  प्राकट्य हुआ था। अब यमुना जी रावल गांव से थोड़ी दूर है, लेकिन आज से करीब पांच हज़ार वर्ष पूर्व यमुना जी रावल में होकर ही वहती थीं। माता कीर्ति यमुना स्नान करते हुऐ माँ से एक सुन्दर पुत्री का वरदान मांगती थीं। माँ यमुना ने माता कीर्ति की प्रार्थना स्वीकार की। एक दिन स्नान करते वक्त आराधना के बाद जब ...

चारधाम यात्रा पर भी कोरोना का दंश

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कोरोना महामारी का असर, मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने चार धाम यात्रा की स्थगित देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देख कर पहले ही अनुमान लगाया जा रहा था कि इस बार चार धाम यात्रा भी स्थगित हो सकती है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इसी को लेकर आज सुबह बड़ी बैठक भी बुलाई । इस बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज मौजूद रहे। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इस बात की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि चार धाम यात्रा को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया है । कपाट खुलने के दौरान संबंधित रावल तीर्थ पुरोहित और पुजारी ही मौजूद रहेंगे। संबंधित जिले और प्रदेश से लेकर प्रदेश के बाहर के लोग भी पूरी तरह से प्रतिबंधित होंगे। विधि विधान के साथ सिर्फ पुजारी और रावल ही कपाट खोलेंगे। यहां हम आपको बता दें कि चार धाम यात्रा स्थगित किए जाने पर कारोबारियों का  उत्साह भी ठंडा पड़ गया है। होटल ढाबों को सजाने संवारने का कार्य नहीं होने से इससे जुड़े कामगार भी मायूस हैं। क्षेत्र में हजारों लोगों की आजीविका यात्रा पर ही टिकी है। ऐसे में यात्रा नहीं चलने से इन लोगों को भविष्य की च...

आज है हनुमान जी का जन्मोत्सव

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आज है हनुमान जन्मोत्सव ब्रजद्वार (हाथरस)। विशेष पूजा करके पाएं हनुमान जी का शुभ आशीष। सनातन (हिंदू) धर्म में हनुमान जन्मोत्सव का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन अपने आराध्य देव हनुमान जी के लिए उपवास भी रखते हैं। पवनपुत्र हनुमान को भगवान शिव का 11वां अवतार माना जाता है। हनुमानजी का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन हुआ था। भक्तों का मंगल करने के लिए प्रभु श्रीराम के भक्त हनुमानजी धरती पर अवतरित हुए थे। इस बार यह तिथि 27 अप्रैल दिन मंगलवार को है। हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की पूजा पाठ करने से शत्रु पर विजय और हर मनोकामना पूरी होती है। आइये जानते हैं कैसे हुआ हनुमानजी का जन्म  हनुमानजी की जन्म कथा इस प्रकार बताई जाती है कि समुद्रमंथन के बाद भगवान शिव ने भगवान विष्णु का मोहिनी रूप देखने की इच्छा प्रकट की थी। जो उन्होने समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और असुरों को दिखाया था। उनकी इच्छा का पालन करते हुए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर लिया। भगवान विष्णु का आकर्षक रूप देखकर शिवजी कामातुर हो गए और उन्होंने अपना वीर्यपात कर दिया। पवनदेव ने शिवजी के वीर्...

भये प्रकट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी

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भीलनी के वेर सुदामा के तंदुल रुचि रुचि भोग लगाये बड़ा ही मार्मिक प्रसंग  👇👇👇👇👇👇👇👇👇 लगाता टकटका कर काफी देर तक उस सुपुरुष को निहारते रहने के बाद बुजुर्ग भीलनी के मुंह से बोल फूटे: "कहो राम! सबरी की डीह ढूंढ़ने में अधिक कष्ट तो नहीं हुआ?" श्रीराम मुस्कुराए: "यहां तो आना ही था मां, कष्ट का क्या मूल्य...?"     *"जानते हो राम! तुम्हारी प्रतीक्षा तब से कर रही हूँ जब तुम जन्में भी नहीं थे।* यह भी नहीं जानती थी कि तुम कौन हो? कैसे दिखते हो? क्यों आओगे मेरे पास..? *बस इतना ज्ञात था कि कोई पुरुषोत्तम आएगा जो मेरी प्रतीक्षा का अंत करेगा..."* श्रीराम ने कहा: *"तभी तो मेरे जन्म के पूर्व ही तय हो चुका था कि राम को सबरी के आश्रम में जाना है।"*      "एक बात बताऊँ प्रभु! *भक्ति के दो भाव होते हैं। पहला मर्कट भाव, और दूसरा मार्जार भाव। बन्दर का बच्चा अपनी पूरी शक्ति लगाकर अपनी माँ का पेट पकड़े रहता है ताकि गिरे न... उसे सबसे अधिक भरोसा माँ पर ही होता है और वह उसे पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। यही भक्ति का भी एक भाव है, जिसमें भक्त अपने ईश्वर...

द्रोपदी ने तीन स्थानों पर शब्दों का किया था दुरुपयोग, परिणाम में हुआ था महाभारत

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शब्दों को पहले तौलो फिर दो मोल :- श्रीकृष्ण ब्रजद्वार हाथरस। 18 दिन के युद्ध ने, द्रोपदी की उम्र को 80 वर्ष जैसा कर दिया था ...शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी शहर में चारों तरफ़ विधवाओं का बाहुल्य था..  पुरुष इक्का-दुक्का ही दिखाई पड़ता था  अनाथ बच्चे घूमते दिखाई पड़ते थे और उन सबकी वह महारानी द्रौपदी हस्तिनापुर के महल में निश्चेष्ट बैठी हुई शून्य को निहार रही थी ।  तभी,श्रीकृष्ण कक्ष में दाखिल होते हैं , द्रौपदी कृष्ण को देखते ही दौड़कर उनसे लिपट जाती है ... कृष्ण उसके सिर को सहलाते रहते हैं और रोने देते हैं .....थोड़ी देर में, उसे खुद से अलग करके समीप के पलंग पर बैठा देते हैं ।  द्रोपदी : यह क्या हो गया सखा ?? ऐसा तो मैंने नहीं सोचा था । कृष्ण : *नियति बहुत क्रूर होती है पांचाली..वह हमारे सोचने के अनुरूप नहीं चलती* *वह हमारे कर्मों को परिणामों में बदल देती है..* तुम प्रतिशोध लेना चाहती थी और, तुम सफल हुई, द्रौपदी !  तुम्हारा प्रतिशोध पूरा हुआ... सिर्फ दुर्योधन और दुशासन ही नहीं, सारे कौरव समाप्त हो गए  तुम्हें तो प्रसन्न होन...

मृत्यु सत्य है जीवन एक कला है और पुनर्जन्म एक परिणाम है। आइये समझते हैं

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क्या पुनर्जन्म होता है ? सदाशिव की इच्छा से होता है सृष्टि का सृजन  ब्रजद्वार हाथरस। आइये कुछ प्रश्न और उनके उत्तर तलाशते हुए पुनर्जन्म से संबंधित कुछ तथ्यों को खंगालते हैं। आखिर पुनर्जन्म होता क्या  ? इसका इस जीवन में क्या  ?महत्व है। कुल मिलाकर इस रोचक तार्किक विषय पर चर्चा करते हैं और जानते हैं सत्य क्या है और सनातन क्या है ? (1) प्रश्न :- पुनर्जन्म किसको कहते हैं ? उत्तर :- जब जीवात्मा एक शरीर का त्याग करके किसी दूसरे शरीर में जाती है तो इस बार बार जन्म लेने की क्रिया को पुनर्जन्म कहते हैं । (2) प्रश्न :- पुनर्जन्म क्यों होता है ? उत्तर :- जब एक जन्म के अच्छे बुरे कर्मों के फल अधुरे रह जाते हैं तो उनको भोगने के लिए दूसरे जन्म आवश्यक हैं । (3) प्रश्न :- अच्छे बुरे कर्मों का फल एक ही जन्म में क्यों नहीं मिल जाता ? एक में ही सब निपट जाये तो कितना अच्छा हो ? उत्तर :- नहीं जब एक जन्म में कर्मों का फल शेष रह जाए तो उसे भोगने के लिए दूसरे जन्म अपेक्षित होते हैं । (4) प्रश्न :- पुनर्जन्म को कैसे समझा जा सकता है ? उत्तर :- पुनर्जन्म को समझने के लिए जीवन...