रावल में प्रकटी श्री राधे बरसाना किशोरी धाम

*रावल प्राकट्य स्थल तो बरसाना किशोरी धाम*
*-अष्टमी को प्रकटी थीं राधे तो अष्टमी को ही जन्मे थे श्रीकृष्ण*
*ब्रजद्वार (हाथरस)।* रावल जी में  गर्भगृह, बरसाना किशोरी धाम। मथुरा जी में जन्मे कन्हैया जय हो नंद के धाम। कृर्ष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था तो राधे ने रावल गांव में अवतरण लिया था। आइये मिली जानकारी के अनुसार करते है कुछ चर्चा।
          ऐसा कहा जाता है कि राधा जी बरसाने की थीं, लेकिन पौराणिक साक्ष्य और विद्वजनों की पुष्टि के अनुसार राधा जी का प्राकट्य बरसाना धाम से 50 किलोमीटर दूर रावल जी में हुआ था। आज भी यह गांव रावल के नाम प्रसिद्ध है। ऐसा वृतांत है कि रावल गांव से गुजरने वाली यमुना जी में कमल के पुष्प के साथ माँ राधिकारानी का 
प्राकट्य हुआ था। अब यमुना जी रावल गांव से थोड़ी दूर है, लेकिन आज से करीब पांच हज़ार वर्ष पूर्व यमुना जी रावल में होकर ही वहती थीं। माता कीर्ति यमुना स्नान करते हुऐ माँ से एक सुन्दर पुत्री का वरदान मांगती थीं। माँ यमुना ने माता कीर्ति की प्रार्थना स्वीकार की। एक दिन स्नान करते वक्त आराधना के बाद जब राधा जी की माता कीर्ति जी ने आँखे खोली तो देखा कि यमुना से कमल का फूल प्रकट हुआ। उस कमल के फूल से सोने की चमक सी रोशनी निकल रही थी। इसमें एक अति सुन्दर छोटी सी बच्ची थी। जिसके नेत्र बंद थे। बाबा वृषभानु जी के यहाँ बच्ची के प्राकट्य को लेकर अष्टमी को जन्मोत्सव मनाया गाया। आज भी यहाँ जन्मस्थान की जगह मंदिर का गर्भगृह है और राधाष्टमी को भव्य उत्सव होता है।
*कृष्ण से 11 महीने बड़ी थीं राधा जी*
राधाष्टमी के 11 महीने बाद मथुरा से तीन किलोमीटर दूर कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी अष्टमी तिथि को ही हुआ था। जिनको बाबा बसुदेव ने रात को ही यमुना पार कर गोकुल में नंदबाबा के भवन में  पर पहुंचाए दिया था। तब नंद बाबा ने सभी जगह संदेश भेजा और कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। जब निमंत्रण पर बधाई लेकर वृषभानु जी अपने गोद में राधारानी को लेकर यहां गए तभी राधारानी ने जन्म के बाद पहली बार अपनी आँखें खोली थी और घुटनों के बल चलते हुए बालकृष्ण के पास पहुंच गई थी।

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