आइए जाने चुटिया की करामत

सफलता चाहिए तो केश (चुटिया) की करामात जाने 
-चिंतनी की क्षमताओं को बल प्रदान करती है  आपकी चुटिया
- जनेऊ का जरूरी पन
आइये जानते हैं क्या है मानना
ब्राह्माण यानी (मस्तिष्क) के पीछे जो केश (बाल) बढ़ाने की भरतीय पद्धति है, जिसे हम ‘‘चुटिया’’ कहते हैं दरअसल वह आपके दिमाग को क्षमताएं प्रदान करती है। साथ ही आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमताओं को भी आशातीत बल प्रदान करती है, लेकिन पाश्चात्यता  के बढ़ते प्रभाव और भारतीय सोच, संस्कार, संस्कृति और सभ्यता को पीछे ढकेलने का काम जो पिछले नेतृत्वों ने किया है, नोवल कोरोना वायरस उसी का एक परिणाम है। भारतीय सोच, संस्कार और संस्कृति का मूल जो है वह वैदिकता और आध्यात्मिकता से गुजरता हुआ सीधा विज्ञान को टच करता है।

अगर आप आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उन्हें सुसंस्कारवान बनाइये। सिर पर चोटी और धड़ पर जनेऊ होना चाहिए। साथ ही हर घर से प्रातः और सायं गायत्री मंत्र की गूंज होना आरंभ होनी चाहिए।
घरों से लेकर प्रतिष्ठानों तक, सड़क से लेकर संसद तक और द्वार से लेकर खलिहानों तक समय-समय पर हवनों के कुंडों में आहुतियां दी जाय तो निश्चित मानियेगा कि यज्ञों से उठने वाला पवित्र धुआं पर्यावरण मजबूत बनायेगा और आने वाली भारतीय  पीढ़ियों की नस्लें भी फिर से पंडित
चांणक्य, पंडित तेनालीराम, आर्यभट्ट, स्वमी विवेकानंद, भगवान महावीर स्वामी, गौतम बुद्ध जैसी हस्तियों को जन्म देगा। और तो और कोरोना क्या उससे भी जटिल महामारी बहुत ही हल्की लगेगी। क्योंकि हमारे पास क्षमताएं होगी, बौद्धिकता के साथ संसाधन भी होंगे। अगर सिर पर चोटी के साथ नजेऊ का यदि साथ होगा तो।

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