21 दिसंबर 2020 को कमजोर होगा कोरोना और 5 अप्रैल को होगी कोरोना की बिदाई

21 दिसंबर 2020 को कमजोर होगा कोरोना और 5 अप्रैल को होगी कोरोना की बिदाई

गुरू और शनि के मिलन में लोक हित की गवाही देगा 21 दिसंबर

21 दिसंबर होगा वर्ष का सबसे छोटा दिन
गुुरू बृहस्पपति और शनिदेव का मिलन होगा लोक हित में लाभदायक 

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ब्रज की द्वार देहरी रस की नगरी हाथरस। 21 दिसंबर  का दिन  खगोलिय घटनाओं और लोकहितकारी शुभ सूचना के लिये वेहद खास होने वाला है। इस दिन देवगुरु बृहस्पति और शनि का मिलन शनि की मकर राशि में होने जारहा है। वहीं 21  दिसंबर वर्ष 2020  का सवसे  छोटा दिन भी होगा। साथ ही ग्रहयोगों के कारण कोरोना पीड़ितों की सर्वाधिक शीर्ष गिनती  भी  इस दिन के आस-पास ही रह सकती है। वही भारत द्वारा निर्मित वैक्सीन की घोषणा भी संभवतः इसी दिन होने की उम्मीद को  ग्रह संकेत कर रहे हैं।
          श्री कार्त्तवीर्य नक्षत्र ज्योतिष संस्थान् के संस्थापक आचार्य विनोद शास्त्री के अनुसार पिछले वर्ष 2019 में धनु राशि मे बैठे गुरू,  शनि और  केतु ने महामारी का योग बनाया था। क्योंकि गुरू के साथ कोई  भी पापी या क्रूर ग्रह  बैठता है तो विष योग बनाता है। इस योग के कारण ही महामारी फैली थी। 24 जनवरी 2020 को राशि परिवर्तन करने से  आशा बनी कि महामारी कम होगी। परंतु शनि और केतु के बीच गुरू के  आने के कारण पाप कर्तरी योग बाना था जो बडा ही भयावह  था। 
शनि के राशि परिवर्तन से परंतु 23 सितंबर 2020  को राहू-केतु के राशि परिवर्तन ने कोरोना के प्रभाव को कम ही नहीं किया, अपितु लॉकडाऊन खोलने में भूमिका अदा की।  वही शनि ने 20 नवंबर को गुरू के मकर राशि में प्रवेश के साथ शनि  से युति ने पुनः विष योग का निर्माण किया है। परिणाम कोरोना का प्रभाब बनेगा जो 21  दिसंबर को  गुरू और शनि के सर्वाधिक निकट होने के साथ ही इस दिन के बाद दूर होते चले जायेगें। इसके चलते महामारी का प्रभाव कम होता चला जायेगा। ग्रहों की गणनाओं में  5 अप्रैल 2021 को राशि परिवर्तन के साथ कोरोना की विदाई हो जायेगी।
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बनेगी वैक्सीन
21 दिसंबर  को होने वाली गुरू शनि की एक ही अंशों पर आने के बाद लगभग 16 दिनों के बाद तक  धनु राशि वाला भारत अपनी स्वनिर्मित वैक्सीन की संभावतः  घोषणा करेगा।  क्योंकि गोचर में सोलह दिन आगे  और सोलह दिन बाद तक बृहस्पति अपना  फल देते है।

नग्न आँखो से देख सकेगे शनि - गुरू की युति

आचार्य विनोद शास्त्री के अनुसार मकर राशि में गुरू और शनि के एक ही अंशों में आने की खगोलिय घटना  59 वर्ष  पहले 18 फरवरी सन् 1961 को रात्रि 08:42 पर घटित हुई थी।
          ऐसी ही  घटना  दिनांक 21  दिसंबर को प्रातः 09:43  पर गुरू और शनि मकर राशि में 06 अंश 15 कला 45 विकला पर दोनों के विम्व एक होंगे।  जिसमें गुरू द्वारा शनि को ढका जायेगा। इस खगोलीय घटना को गुरू और शनि का पारगमन कहा जा सकता है। जिसे पूर्वी देश नग्न आंखो से देख सकेगे।  *ब्रज की द्वार देहरी रस की नगरी हाथरस नगर* सहित भारत में यह खगोलीय घटना सूर्यास्त के बाद आकाश में दक्षिण -पश्चिम के बीच दिखाई देगी।

गुूरू और शनि होगे सबसे निकट !
भचक्र में अपने परिक्रमा मार्ग  पर परिक्रमा करते हुए देवगुरु बृहस्पति और शनि  आपस में सबसे निकट होंगे। इस समय  दोनों के बीच की दूरी मात्र साढे 6 करोड किमी. रह जायेगी। उस समय पृथ्वी और शनि के बीच अंशात्मक कोण में बृहस्पति बीच में आ जायेंगे। इस कारण  बृहस्पति और शनि आपस में सबसे निकट होकर गुजरेंगे। 
21  दिसम्बर को वर्ष का होगा सवसे छोटा दिन!
हमारे भचक्र में सूर्य की परिक्रमा पृथ्वी के  उत्तर दिशा की ओर 23.27 अंशों पर झुकी अवस्था में ही परिक्रमा करते रहने के कारण दिन -रात छोटे तथा बडे होते हैं। ऐसी ही खगोलीय घटना प्रत्येक वर्ष की भांति  इस वर्ष  भी घटेगी। जब रात्रि 13 घंटे 33 मिनट की सर्वाधिक बडी होगी।  वही वर्ष का सवसे  छोटा दिन भी  21 दिसंबर को 10 घंटे 27  मिनट  का होगा।

🌹जय श्री हरि🌹
🙏🙏🙏🙏🙏

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