इस मूर्ति में आज भी होती है धड़कन (चलती हैं पल्स)
आज भी धड़कती है श्री कृष्ण यह मूर्ति
गुजरात के घरपुर स्थित मंदिर स्वामीनारायण होते हैं इस प्राचीन मूर्ति के दर्शन
ब्रज की द्वारदेहरी रस की नगरी हाथरस। ठाकुर जी की नित्य नई लीला हमें आज भी देखने और सुनने को मिलती हैं। जी हां! हम इस चल रहे कलिकाल की ही बात कर रहे हैं। आइए ले चलते हैं आपको गुजरात के घरपुर की ओर। जहां आज भी सैकड़ो वर्ष पुरानी ठाकुर की पल्स से चलती है।
जो सांसारिक हैं वह चमत्कार को नमस्कार करते हैं, लेकिन जो भगवान की भक्ति में भावविभोर हो चुके हैं वह जीवन के हर पल को प्रभु का एक चमत्कार ही समझते हैं। अगर हम गुजरात के घरपुर की बात करें तो वहां आज भी एक चमत्कार स्पष्ट दिखाई देता है। चमत्कार का मूल तत्व है सैकड़ों वर्ष पुरानी श्री कृष्णमूर्ति के हाथ में बंधी वह घड़ी, जो आज भी श्रीकृष्ण के मूर्ति को पहनाते ही चल पड़ती है। अर्थात समय बताना आरंभ कर देती है। कहते हैं कि जब इस घड़ी को उतारते हैं तो यह रुक जाती है और जैसे ही श्रृंगार के बाद जब यह घड़ी श्री कृष्ण जी की दिव्य मूर्ति को हाथ में पहनाई जाती है तो यह उनकी पल्सर के माध्यम से चलना शुरू कर देती है। हालांकि इस विषय में कहा तो यह जाता है की यह मूर्ति 500 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है।
बताया जाता है कि तकरीबन पांच सौ वर्ष पूर्व भ्रमण पर आए एक अंग्रेज ने यह घड़ी भगवान के लिए दी थी। इसका मुख्य कारण यह भी बताया जाता है कि उस अंग्रेज को इस बात पर कहीं सकता था कि मूर्ति में प्राण होते हैं या नहीं ? इस तर्क को वह स्वयं जानना चाहता था। वह इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं था कि मूर्तियों प्राण प्रतिष्ठा के बाद स्थापित किया जाता है और प्रतिष्ठा के बाद मूर्ति में प्राण आजाते है और उनके आगे की गई प्रार्थना को गाॅड सुनकर प्राॅब्लम का साॅल्युसन भी करता है। इसी तर्क को करते हुए इस बात की जानकारी के लिए उस अंग्रेज ने जानकारी के लिए घड़ी को पुजारी जी महाराज से अपनी उस घड़ी को भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति के हाथ में पहनाने के लिए कहा था। अंग्रेज का तर्क था कि अगर यह गॉड है तो निश्चित रूप से मूर्ति में समय धड़कन होगी। हालांकि उस वक्त भी किसी को विश्वास नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है। क्योंकि जो घड़ी अंग्रेज ने दी थी उसकी खासियत यही थी कि यह व्यक्ति के शरीर में चलने वाली पल्सों से स्टार्ट होती थी। लिहाजा घड़ी को भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति के हाथ में पहनाया गया तो गाड़ी चल पड़ी। बस फिर क्या था। उसी अंग्रेज ने प्रभु का इतना गुणगान किया कि आज भी अंग्रेज इंडिया के गाॅड (भगवान) के दीवाने हैं। बताते है वह अंग्रेज प्रभु का दीवाना हो गया था , वैराग्य में विचरण करने लगा था। कहा यह भी जाता है कि आज भी यह घड़ी मौजूद है। जो गुजरात के घरपर नगर के मंदिर स्वामीनारायण देखी जा सकती है। मंदिर में आज भी श्री कृष्ण जी की मूर्ति मौजूद है और वह घड़ी भी आज भगवान को श्रृंगार के बाद पहनाई जाती है। ब्रह्म मुहूर्त में मंगला आरती के बाद जब भगवान का अभिषेक पूजन किया जाता है तो उस घड़ी को उतार दिया जाता है। चमत्कार तो यह है कि घड़ी प्रभु के हाथ से उतरते ही बंद हो जाती है, लेकिन श्रृंगार के बाद जब घड़ी पहनाई जाती है तो घड़ी पुन: चलना आरंभ कर देती है अर्थात समय बताना शुरू कर देती है।
सच क्या है ? यह तो पहुंच करके ही आप लगा सकते हैं, बाहरहाल जो बताया गया है और वह सच है तो क्या किसी चमत्कार से कम है क्या ? हम साभार करते हैं उन भक्तजन का जिन्होंने यह जानकारी हमतक पहुँचाई।
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यह भगवान का एक महान चमत्कार ही कहा जा सकता है। इसलिए कुछ नहीं रखा है इस जिंदगी में। यहां आए हैं इस संसार में तो अपने सांसारिक कार्यों के साथ-साथ श्री राधा नाम का स्मरण हमें अवश्य करना चाहिए। कहते हैं
*राधा नाम बोलो सहारा मिलेगा* *जीवन में तुमको किनारा मिलेगा* जय जय श्री राधे
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Jai shree radhe
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