सेना का संहार कर छोड़ देते थे जरासंध को श्रीकृष्ण यह था, 👉 कारण
17 बार सेना का संहार कर छोड़ा था जरासंध को
-क्रोधित श्री बलराम जी को बताया था श्री कृष्ण ने यह करण
ब्रज की द्वार देहरी रस की नगरी हाथरस के रुई की मंडी स्थित मंदिर श्री ठा. कन्हैयालाल जी महाराज के दर्शन
ब्रज की द्वार देहरी रस की नगरी हाथरस।* जय जय श्री राधे! जिस प्रकार लोह तत्व को चिम्मकीय तत्व अपनी ओर खींच लेता है उसी प्रकार प्रभु अंशावतारी दुष्टों को किसी न किसी बहाने या कारण से अपनी ओर खींच कल उनका उद्धार कर देते है। अइये पढ़ेंते हैं जरासंध और उसके उद्धार की कथा।
प्रसंगानुसार एक बार भगवान बलभद्र लघु भ्राता कृष्ण पर नाराज हुए। नाराजी का कारण था जरासंध का बार-बार आक्रमण। एक वार की बात है जब कंस के अत्याचार बढ़े और उपयुक्त समय आया तो श्रीकृष्ण और बलराम जी ने उसका अंत कर दिया, लेकिन कंस के बधा की जानकारी होते ही उसका ससुर अति क्रोधित हो उठा। कंस की मृत्यु यानी अपने जमाई का अंत उसको रोक न सका और जरासन्ध ने क्रोधित हो श्री कृष्ण व बलराम को मारने के लिए आक्रामक कर दिया। इस आक्रमण में जरासंध की सारी सेना मारी गई, वह बच कर भाग निकला। इसके बाद उसने फिर अपनी शक्ति बढ़ाई और फिर आक्रमण किया इसी प्रकार जरासंध ने मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया।
Herbaldhara एक ऐसा सिस्टम जिसमें न पैसा लगाने की आवश्यकता भी नहीं कोई रिस्क है न कोई झंझट सिर्फ और सिर्फ अपने घर का सामान खरीद ने से शुरू हो जाता है आपक अपना बिजनेस। संपर्क:-8630588789 & 9458634066
घर में लानी है खुशियाँ तो घुमाइये इन नंबरों पर उंगलियां
प्रत्येक पराजय के बाद जरासंध अपनी समान के सोच वाले मित्र राजाओं का समर्थंन प्राप्त करता और मथुरा पर आक्रामक करता। जबकि श्रीकृष्ण बार-बार जरासंध व उसके मित्र राजाओं की सेना का संहार देते, बल्कि मात्र जरासन्ध को ही छोड़ देते थे। जब यह सब जेष्ठ भ्राता श्री बलराम जी ने देखा तो वह बहुत क्रोधित हो उठे। उन्होने श्री कृष्ण से कहा, "बार-बार जरासंध हारने के बाद पृथ्वी के कोनों-कोनों से दुष्टों के साथ महागठबंधन कर के मथुरा पर आक्रमण कर रहा है। जबकि तुम पूरी सेना का तो संहार कर देते हो किंतु उस दुष्ट जरासंध को ही क्यों छोड़ देते हो ?"
अपने जेष्ठ भ्राता श्री बलराम जी को नाराज देकते हुए उनसे हंसते हुए श्री कृष्ण ने कहा, "हे भ्राता श्री जरासंध को बार-बार यह जानते हुए भी छोड़ रह हूँ कि वह दुष्ट है और उसका दुष्टों से ही संबंध है। इसलिए जरासंध पूरी पृथ्वी से दुष्टों के साथ महागठबंधन करता है और मेरे पास लाता है। जबकि मैं बहुत ही आसानी से एक ही जगह रहकर धरती के सभी दुष्टों का संहार दे रहा हूँ। नहीं तो मुझे इन दुष्टों को मारने के लिए पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाना पड़ता।
जरासंध ने मेरा कार्य बहुत आसान कर दिया है"
श्री कृष्ण ने आगे कहा, " हे भ्राता!आपकी चिंता कदाचित उचित ही है, लेकिन जब सभी दुष्टों का संहार कर दूँगा तब जाकर अंतिम चरण में पहले से नियत तरीके से उसका संहार कराते है उद्धार होगा।"
जय जय श्री राधे जय जय श्री बाँके बिहारी लाल की जय हो।
Comments
Post a Comment