अधर्म को धर्म और भक्ति रस से सींच भक्ति की खेती खड़ी की बाबा महाराज ने
डाकुओं की शरणस्थली रहे ब्रह्मांचल पर्वत को फिर से बनाया भक्ति प्रबोधिनी
-बाबा महाराज की पहल से आज मान गढ़ पर्वत पर डाकुओं की ललकार नहीं राधे नाम का होता है उच्चारण
ब्रज द्वार हाथरस। भक्ति में वह शक्ति होती है कि दुर्जन व दुष्ट स्वत: ही दूर हो जाते हैं। बाबा महाराज ने अपने जीवन में यह सिद्ध करके भी दिखा दिया। क्योंकि ब्रह्मांचल पर्वत धीरे-धीरे डाकुओं की शरणस्थली से पुनः भक्ति प्रबोधिनी बन गया और आज इसका जीता जागता प्रमाण है मान गढ़ पर्वत।
इतिहास के पन्नों को पलटेंगे तो
बरसाना के ब्रह्मांचल पर्वत को डाकुओं के डकत्य का स्थान पायेंगे, लेकिन आज वहां राधा नाम गूंजता है। क्योंकि पहले वहां पर (ब्रह्मांचल पर्वत) ख़ास कर मान गढ़ उन दिनों डाकुओं की शरणस्थली यानी डाकुओं के छुपने का स्थान होता था। उन दिनों जहान डाकू का बड़ा खौफ था।
राजस्थान, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में उसका आतंक था। कहते हैं कि मान गढ़ पर उसके छुपने का ठिकाना बनाया था। बताते हैं कि बाबा ने प्रभु आराधना के लिए मान गढ़ को ही चुना। उस स्थान पर धार्मिक गतिविधियों के बढ़ने से डाकुओं को वह स्थान छोड़ना पड़ा। किसी जर्जर, लुप्तप्राय धर्मस्थल को कब्जा मुक्त कराने में बाबा को मिली वह पहली सफलता थी।
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जय जय श्री राधे जय जय श्री बाँके बिहारी लाल की जय हो जय हो
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जय जय श्री राधे
ReplyDeleteजय जय श्री राधे
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