जहाँ खेली थी राधा संग होली वहां पहुंचे ब्रजद्वार हाथरस के भक्त
कृष्ण और गोपियों साथ होली के राधा ने किया था गुलाल कुंड में स्नान
ब्रजद्वार हाथरस। ब्रज का द्वार कहे जाने वाले नगर हाथरस चौरासी कोसीय यात्रा जब गुलाल पहुंची तो सभी द्वापर युगीय बिरासत ''गुलाल कुंड'' को देख सभी भक्तों ने अपने आपको राधाकृष्ण के साथ होने की अनुभूति महसूस की।
बतादें अनेको धार्मिक पुस्तकों में जिसका वर्णन मिलता है वह ''गुलाल कुंड'' गोवर्धन से डीग मार्ग पर गांव गांठोली में स्थित है। कहते हैं जैसा नाम वैसा ही कुछ गुलाल कुंड का इतिहास भी है। मगर इसको दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि राधाकृष्ण की द्वापर युगीन होली लीला के इस प्रमाण की ओर गंभीर से नहीं देखा गया तो यह प्रमाण भी अब विलुप्तता की ओर चला जायेगा।
पं. घनश्याम शर्मा बरसाने बाले बताते हैं कि आज भी धार्मिक पुस्तकों में गुलाल कुंड का वर्णन मिलता है। जहाँ राधारानी गोपियों के साथ कान्हा से गुलाल होली खेलने आईंं थी। होली में इतना गुलाल उड़ा था कि आसमान पर रंगों के बादल छा गये थे तो धरा पर रंगीन चादर सी बिछ गई थी। बताते हैं चेहरे पर लगे गुलाल के कारण एक दूसरे की
पहचान मुश्किल हो गई थी। यहां प्रसंग आता है इसी गुलाल कुंड में होली खेलने के बाद राधाकृष्ण ने गोपियों के साथ स्नान किया था। जिससे कुंड का जल भी गुलाल के रंग में रंग गया था।
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