बलराम ने धेनुकासुर संहार कर किया था उद्धार
तालवन पहुँचे ब्रजद्वार हाथरस के भक्त
ताड़ो के वृक्षों सघन स्थान को ही तालवन पड़ा यहाँ का नाम
ताड़ के फलों को गिरने की आवाज़ से जागा था धेनुकासुर, बलराम ने किया उद्धार
ब्रजद्वार हाथरस। धेनकासुर का वध स्थल को ही आज तालवन के नाम से जाना जाता है 07 फरवरी 2021 रविवार को ब्रजद्वार हाथरस से चौरासी कोस यात्रा पहुँची तो महाराज जी ने बताया कि यहां पर ताड़ वृक्षों बड़ा ही रमणीक स्थल था।
उन्होंने बताया कि करीब साढ़े पांच हजार साल पहले यहां पर ताड़ के सुंदर पके फलों की सुगंध बलराम और कृष्ण को अपने सखाओं के साथ तालवन में खींच लाई थी। जब ग्वाल-बाल श्रीदामा, सुबल, स्तोक, तेजस्वी को भूख लगी तो उन्होंने खाने के लिए फल तोड़ लिए। जब फलों के गिरने की आवाज हुई तो वहां सो रहे राक्षस धेनुकासुर की नींद खुल गई। ग्वालों पर जब उसने आक्रमण किया तो बलराम ने उसका वध कर दिया और वहां हल से ताल खोद दिया था। उस ताल से पानी पीकर सखाओं ने प्यास बुझाई थी। 52 बीघा क्षेत्रफल में फैला ये तालवन पिछले कुछ सालों तक आबाद रहा था। हाईवे से भरतपुर मार्ग पर
तालवन है। ये भू अभिलेखों में तारसी गांव के नाम से दर्ज है। पैदल ब्रज चौरासी कोस यात्रा का मधुवन (मथुरा में ही एक स्थान) के बाद ये दूसरा पड़ाव है। मधुवन से चार किमी यात्रा कर तीर्थयात्री तालवन पहुंचते हैं। ब्रजद्वार हाथरस से रविवार को पहुंची चौरासी कोस यात्रा में शामिल भक्तों ने यहाँ तालवन देख भगवान श्री कृष्ण, बलराम व माता रेवती के दर्शन किये।
इस अवसर पर श्री कैलाश चंद्र वार्ष्णेय, प्रदीप अग्रवाल, रमेशचन्द्र अग्रवाल, आशा शर्मा, अलका शर्मा, दिनेश शर्मा, पंकज वार्ष्णेय, रोचक जैन, अशीष जैन, संजय माहेश्वरी, सचिन अग्रवाल, विकास अग्रवाल व संजय दीक्षित एडवोकेट सहित दर्जनों भक्तजन थे।
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