सबसे पहले राधा जी की नानी मुखराई देवी ने किया था चरुर्कुला नृत्य

सबसे पहले राधा जी की नानी मुखराई देवी ने किया था चरुर्कुला नृत्य 
- ब्रजद्वार के भक्तों ने लगाई सतोहा बिहारी, कुशल बिहारी, दान बिहारी व अष्ट सखी दरबार में अर्जी
हाथरस (ब्रजद्वार)। जब नानी मुखराई देवी को यह जानकारी हुई कि उनकी बिटिया कीर्ति देवी को पुत्री (राधिका जी) की प्राप्ति हुई है तो वह मुखराई गांव में पड़े एक रथ के पहिये पर चारों ओर दीप प्रज्ज्वलित कर नृत्य करने लगीं। बाद में यही नृत्य पूरे विश्व में चरुर्कुला नृत्य के नाम से विश्वविख्यात हुआ। 
        यह जानकरी ब्रजद्वार हाथरस से पहुंची मासिक ब्रज बरसाना यात्रा के दौरान राधा जी के ननिहाल गांव मुखराई में सेवायुत पंडित जी महाराज ने दी। उन्होंने पूरा पारिवारिक वृतांत इस प्रकार बताया 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻

🌷श्री राधा जी का परिवार🌷
श्री राधा जी के पिताजी श्री वृषभानु जी महाराज थे, माता  श्री कीर्तिदा महारानी (कलावती जी इनका दूसरा नाम था)। भाई श्री दामा सबसे बड़े हैं (और समस्त भाई बहनों में सबसे छोटा एक भाई है जिसका उल्लेख जिव गोस्वामी जी और सूरदास जीने भी किया है)। बहन अनंग मंजरी जी (छोटी बहन)। 
जबकि दादा जी श्री महिभानु जी महाराज थे और दादी जी श्री सुखदा रानी (मनोहरा जी )। चाचा श्री रुचिभानु बरभानु सुभानु रतिभानु थे। जबकि ताऊजी श्री महाभानु श्री सत्यभानु श्री गुनभानु श्री धर्मभानु थे और बुआ श्री भानुमती जी और श्री भानुमुद्रा जी थीं।  भाभी श्री दामा जी की पत्नी रम्भा जी थीं। 
🪷श्री राधारानी जी का ननिहाल🪷
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नाना जी श्री भलन्दन जी महाराज जिन्हें इन नामों 👉🏻 (इंदुसेन जी के अलावा सुखदा या सुमुखमणि गोप भी जानते हैं) व नानी जी श्री मुखरा जी थी। मामा जी श्री भद्रकीर्ति जी, श्री महाकीर्ति जी व श्री चन्द्रकीर्ति थे। जबकि मामी जी क्रमशः श्री मौना जी, श्री मेनका जी, श्री षष्टि जीथी। मौसी जी का नाम कीर्तिमती जी थी।
        हालांकि इससे पूर्व यात्रा ब्रजद्वार के कस्बा मुरसान स्थित मंदिर  श्री पीपल माता और फिर सतोहा बिहारी जी महाराज मथुरा भी पहुंची और दर्शन किये। जबकि अंत में ब्रज धाम बरसाना पहुंच कर राधारस मंदिर से गहवरवन परिक्रमा लगाते हुए मोरबिहारी जीमहाराज (मोरकुटी), भगवान ललिता बिहारी जी महाराज (ललिता कुटी), दान बिहारीलाल, कुशल बिहारीलाल,  हंसगोपाल,  नृत्यगोपाल के बाद विश्वविख्यात मंदिर श्री लाड़लीलाल सरकार के दर्शन किए। फिर साक्षीगोपाल,  सुदामा मंदिर, अष्ट सखी मंदिर,  सांकरीखोर स्थित मंदिर श्री रघुनाथ जी महाराज होते हुए पुन: राधारास मंदिर पहुंच कर गहवरवन परिक्रमा को पूर्ण किया और देर रात ब्रजद्वार हाथरस पहुंच कर अपनी मासिक यात्रा को संपन्न किया।
प्रस्तुति : संजय केशव दीक्षित 

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