चित्रकूट में भगवान विष्णु कामदनाथ व भगवान शिव मत्यगजेंद्र के रूप में आज भी निवास करते हैं

चित्रकूट में भगवान विष्णु कामदनाथ व भगवान शिव मत्यगजेंद्र के रूप में आज भी निवास करते हैं

चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर,
तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक करे रघुवीर'।

सियाराम मय सब जग जानी,
करहुं  प्रणाम जोर जुग पानी।
ब्रजद्वार (हाथरस)। ब्रज के द्वार कहे जाने वाली हाथरस नगरी से पिछले करीब डेढ़ दशक से भी ज्यादा की हुई मासिक  ब्रज बरसाना यात्रा के अलावा द्वारिका, हरिद्वार,  चार धाम (ब्रज) आदि के बाद चित्रकूट की इस यात्रा में भी भक्ति और भाव का संगम सर्वोपरि होगा।

*यात्रा के दर्शनीय वह 11 स्थल हैं जो बैकुंठ के मार्ग को खोलते हैं*

01•  जानकी कुंड
यह वह स्थान है (वह कुंड है) जहाँ माता जानकी स्नान किया करती थी। इस स्थान पर माता जानकी के चरण-चिन्ह भी मौजूद हैं। माता सीता राजा जनक की पुत्री थी इसलिए उन्हें जानकी भी कहा गया है।

02• स्फटिक शिला

श्री राम जी के जीवन का यह वह स्थान है जो रामायण में विशेष स्थान रखता है। पौराणिक सत्य तो यह है कि यहाँ इस स्फटिक शिला पर ही बैठ कर सीताराम जी अपना अधिकांश समय बिताते थे। मध्य-प्रदेश के जिला सतना स्थित माँ मंदाकिनी के तट पर स्थित इस  स्फटिक शिला पर प्रभु राम के चरण-चिन्ह भी मौजूद हैं। रामायण में वह प्रसंग भी यहीं का बताया गया है जब इंद्र पुत्र जयंत ने माता सीता (जानकी) को काग (कौवा) के रूप में  चौंच मार जख्मी किया था और भगवान श्री राम ने बिना फर (धनुष पर सींख चढ़कर) का वाण मार काना कर दिया था। यह प्रसंग भी यहीं का है कि चित्रकूट स्थित इसी स्फटिक शिला पर बैठकर भगवान श्री राम ने माता सीता का श्रृंगार किया था। बताते हैं, यह शिला बैकुंठ का मार्ग भी है। क्योंकि भाव से परिपूर्ण जो भी भक्त इस शिला को स्पर्श करते हैं वह प्रभु कृपा के पात्र बन जाते हैं।

03• गुप्त गोदावरी
बताते हैं, यह वही गुप्त गोदावरी है जो स्वयं भगवान श्री राम ने  माता सीता के लिए प्राकट्य किय था। वनगवन के समय में भगवान श्री राम,  माता जानकी और भैया लखन लाल ने अधिकतर समय यहीं पर बिताया था। यह बहुत ही रमणीक स्थान है। वर्तमान में यहाँ एक नकारात्मक बात यह है कि यहाँ पर पांडित्य बेषधारियों का बाहुल्य है। यहाँ के दर्शन करते समय इन से उलझें नहीं और बिना किसी विवाद के शांत मन से दर्शन कर निकल आयें।
04• माता अनुसुइया आश्रम
यह वह पौराणिक स्थान है जहाँ ब्रह्म,  विष्णु और महेश को माता अनुसुइया ने बाल रूप में कर दिया था। साथ ही इस स्थान से ही माता मंदाकिनी गंगा का उद्गम हुआ है। यहाँ पर माता अनुसुइया, अत्री ऋषि, दुर्वासा ऋषि व भगवान दत्तात्रेय के मनोरम दर्शन भी हैं।
05• रामघाट 
ऐसी मान्यता है कि रामघाट पर ही गोस्वमी तुलसीदास जी महाराज को भगवान श्री राम और लखन के दर्शन हुए थे। 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻

चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर,
तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक करे रघुवीर'।
06• भरत मंदिर 
रामघाट पर ही भरत मंदिर है। यहाँ पर श्री राम सहित चारों भाइयों,  उनकी पत्नियों, माता व पिता सहित सभी के पूरे परिवार के आलौकिक दर्शन हैं।
07• मत्यगजेंद्र नाथ जी मंदिर
रामघाट पर ही भगवान श्री मत्यगजेंद्र नाथ जी महाराज (शिवजी) का मंदिर है। बताते हैं, भगवान शिव विष्णु क्षेत्र की रक्षार्थ प्रकट होते हैं। यहाँ पर भगवान शिव मत्यगजेंद्र नाथ के रूप में प्रकट हैं। प्रत्येक सोमवार को यहाँ भारी संख्या में साधु-संत जलाभिषेक करते हैं। खास कर श्रवण मास में तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
08• कामद गिरी
चित्रकूट में कामद गिरी पर्वत की परिक्रमा का विशेष महत्व बताया गया है। इसी मार्ग में भरत-मिलाप मंदिर के दर्शनों का भी विशेष महत्व है। यहां के दर्शनों से भगवान श्री राम व कामदनाथ (भगवान विष्णु) का आशीर्वाद मिलता है।
09• कामदनाथ मंदिर 
यह स्थान भी चित्रकूट के विशेष स्थानों में से है। क्योंकि इसी स्थान पर भगवान श्री राम ने भगवान कामदनाथ (भगवान विष्णु) की पूजा की थी।

10• हनुमान धारा
यह वह मंदिर है जहाँ भगवान श्री राम  हनुमान जी के साथ रहे थे। यह एक पहाड़ी पर स्थित है। बताते हैं लंकादहन के बाद हनुमान जी के क्रोध को यहीं भगवान श्री राम ने शांत किया था। यहाँ खड़ी सीढ़ियों की चढ़ाई है और यहाँ से चित्रकूट के मनोरम दृश्यों के दर्शन होते हैं।

11• सीता रसोई 
यह वह स्थान है जहाँ माता जानकी ने वनवास काल में ऋषियों के लिए भोजन पकाया था। यह स्थान हनुमान धारा से थोड़ा और ऊपर है। करीब 550 सीढ़ियों की चढ़ाई के उपरांत माता सीता की रसोई के दर्शन होते हैं।

जय सियाराम, जय हनुमान 

जय जय जय हनुमान गुसांई, कृपा करुहुं गुरुदेव की नाई। 
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