आदि बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम दर्शन से मिलता है हजार गुना पुण्य लाभ

आदि बद्रीनाथ-केदारनाथ के दर्शन से मिले है हजार गुनो लाभ
-आदि बद्रीनाथ-केदारनाथ क्षेत्र में 33 कोटि देवी-दवतान को बास
(01.)  एक चार धाम उत्तराखंड की पहाडियों में है। जहाँ भगवान केदारनाथ व  बद्रीनाथ और माँ गंगोत्री व जमनोत्री के दर्शन हैं। 
(02.)  एक चार धाम भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं माता यशोदा-बाबा नंद के लिए स्वयं आराध्य स्थापित किये हैं। जिन्हें आज आदि बद्री के नाम से जाना जाता है। अर्थात एक बद्रीनाथ व केदारनाथ धाम है ही, लेकिन वाऊ से बड़ी शाक्ति यानि आदि बद्रीनाथ अद्वितीय शक्ति के साथ स्थापित महा शक्ति।
        वैसे विद्वानों की माने तो वृतांत यह है 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻

*🌹कथानक इस प्रकार है🌹*
जब माता यशोदा और नंद बाबा ने लाला से चार धाम तीर्थ यात्रा की ईच्छा जताई और कहा लालारे अब हमारी वानप्रस्थ अवस्था हो चली है। अब क्योंना हम तीर्थ यात्रा कर जीवन की सार्थकता को पूरा करें। यह सुनते ही योगीस्वर भगवान श्रीकृष्ण अपनी पहचान के मुताबिक मुस्कुराये और बोले आरी मैया और बाबा कहाँ जाओगे आप मैं यहीं पर सारे देवताओं (ईश्वर अंशावतारियों) को आमंत्रित कर स्थापित कर देता हूँ। यहीं दर्शन करके आपको हजार गुनो पुण्य लाभ प्राप्त होयेगो। मैया ने कही अरे लालारे ऐसो ऊ होवो करे का। प्रभु बोले मैयारी मोपे एक ऐसी युक्ति है कि सबरे देवता यहीं आमिगे और तुमकूं कई जामनोऊं नहीं परेगो।
*कृष्ण जी द्वारा देवताओं का आह्वान*

भगवान श्रीकृष्ण के आह्वान के बाद स्वयं चारो धामों (केदारनाथ, ब्रद्रीनाथ, गंगोत्री व जमनोत्री) ने ब्रज को बास लियो और यह भी कहयो कि जो मन, वचन और कर्म से यहाँ आय के दर्शन करेगो बाकों सांसारिक मनोकामनाओं के बाद प्रभु को बास मिलेगो। यही अवसर पर 33 कोटि (जो सनातन में 33 प्रकार के देवी-देवता बताये गये हैं) देवी-देवताओं ने भी ब्रज के बास की अनुमति माँगी है। तब भगवान श्रीकृष्ण ने आदि बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम क्षेत्र में ही इन सभी 33 कोटि देवी-देवताओं को ससम्मान स्थान प्रदान कियो है। अर्थात आदि बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में ही अमरनाथ,  वैष्णो देवी सहित सभी शक्तिपीठ और जोतिर्लिंग के अलावा ईश्वर के सभी रूप में या क्षेत्र में दर्शन हैं।
संजय केशव दीक्षित

Comments

Popular posts from this blog

सूर्य पुत्री सुवर्चला के पति हैं हनुमान, सूर्य ने पुत्री सुवर्चला की शादी की थी हनुमान से

बाबा महाराज के संघर्ष ने दिया ब्रज को फिर से पौराणिक स्वरूप

जन्म जयंती पर विशेष: यूपी सरकार ने आरंभ की राजा महेंद्र प्रताप यूनिवर्सिटी