बख्तियार ने दिया था इंसानियत को धोखा, मोदी ने मर्म को तलाश मल्लम लगाना किया आरंभ
बख्तियार ने दिया था इंसानियत को धोखा, मोदी ने मर्म को तलाश मल्लम लगाना किया आरंभ
1200 सौ साल के जख्म पर नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने 19 जून, 2024 बुधवार को मल्लम (दवा) लगाना आरंभ कर दिया और एक बार फिर से अपनी राष्ट्र (सेवा) नीति को स्पष्ट कर दिया, लेकिन सत्ता की लोलुप राज्य करो नीति के अनितिज्ञों को आज भी स्लामियत में अपना भविष्य सुरक्षित दिखाई दे रहा है। जबकि मोदी जी देश, समाज और संस्कृति के काम कर रहे हैं। नालंदा का पुनरोद्धार इसका एक ताजा उदाहरण है।
इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि आक्रांता बख्तियार खिलजी ने 831 ईस्वी में भारत के प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय की इमारत में आग लगा दी थी और जमकर कत्लेआम किया था। इस आग से विश्वविद्यालय में रखी करीब 05 लाख से भी ज्यादा पुस्तकें राख हो गयी थी। उन बेकसूर बौद्ध भिक्षुओं का आखिर क्या कसूर था, जिनको मौत के घाट उतार गया था। इस जघन्य आगजनी और हत्याकांड का सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद था कि भारत की सनातन संस्कृति और उसके ज्ञान को नष्ट करना। सुनी-कही मने तो बख्तियार को एक गंभीर बीमारी से बचाने वाले नालंदा के आयुर्वेदाचार्यों की योग्यता और ज्ञान चुभने लगा था। उसको बचाना ही नालंदा विश्वविद्यालय के अपार क्षति और आचार्यों हत्याकांड का कारण बना था। यह वह वक्ता जब दुनिया भर में नालंदा विश्वविद्यालय को सर्वश्रेष्ठ माना जाता था। इस विश्वविद्यालय में तब भी अन्यत्र देशों के विद्यार्थी अध्ययन करते थे। जिस विश्वविद्यालय को खिलजी ने 1200 साल पहले नष्ट किया उसी नालंदा के नए परिसर का उद्घाटन 19 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। नालंदा बिहार की राजधानी पटना के निकट राजगीर में
स्थित है। उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी ने आक्रमणकारी खिलजी के कृत्यों का तो कोई उल्लेख नहीं किया, लेकिन कहा कि किताबें जल जाए, लेकिन ज्ञान को नहीं मिटाया जा सकता है। भारत के मौजूदा दौर में जब सनातन संस्कृति को नष्ट किए जाने की बात खुलेआम कही जा रही है, तब पीएम मोदी ने भारत की सनातन संस्कृति को मजबूत करने वाला काम किया है। यह विषय चिंतनीय नहीं तो और क्या कहा जाय कि जो नेता सनातन संस्कृति को नष्ट करने की बात कह रहे है वह अब बड़ी संख्या में लोकसभा में पहुंच गए है। नई संसद का माहौल कैसा होगा ? यह आने वाले दिनों में पता चलेगा, लेकिन लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले नरेंद्र मोदी ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। मोदी ने दो दिन पहले बनारस में गंगा आरती में भाग लिया तो 19 जून को नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया। जबकि दूसरी ओर अपने आपको राजनीतिज्ञ कहलाने वाले धूर्त अपने तुक्ष स्वर्थ के चलते भारत की सनातन संस्कृति को नष्ट करने वालों के हिमायत लेते दिखाई दे रहे है। जबकि यहाँ प्रधान मंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने तीसरे कार्यकाल में भी राष्ट्र की सेवा और अपनी संस्कृति को मजबूत करने का उनकी पहल जारी रहेगी।
सूत्रों की माने तो नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरोद्धार वाले परिसर में तकरीबन 900 से ज्यादा विद्यार्थी पढाई कर सकेंगे। सूत्र यह भी बताते हैं कि आज भी इस विश्वविद्यालय में भारत के अलावा 20 अन्य देशों के विद्यार्थी भी अध्ययनरत हैं। बख्तियार खिलजी ने भले ही 1200 साल पहले नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट किया हो, लेकिन मोदी ने उठ कर फिर संभलने वाली कहावत सिद्ध की है। निश्चित ही इस विश्वविद्यालय बख्तियार खिलजी की दानवता का पठ भी पढ़ाया जायेगा और उस नस्ल और हैवानियत की क्रूरतम अकर्म को समझाने का उत्तम प्रयास होगा।
संजय केशव दीक्षित
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