श्रीराम विवाह महा महोत्सव पर ब्रजद्वार बना मिथल और अवथ की तराह

**ले ले नाम राम और सीता गवाही सुंदर मंगल*
- ब्रजदार में दौहराया गया श्री सीताराम विवाह इतिहास
- जगह जगह भव्य स्वागत और पूरी रास्त हुई पुष्प वर्षा
ब्रज की द्वारा देहरी (हाथरस नगरी)। शुक्रवार को आज फिर एक बार त्रेता युगीन माहौल का अभ्युदय हुआ। हनुमान गली स्थित श्री राम दरबार मंदिर में सजी

 अवधपुरी से चारों दूल्हा सरकार की बारात शोभा यात्रा नगर भ्रमण कर तालाब चौराहा स्थित राम चौक मंदिर श्री राम दरबार पर बनी मिथिलापुरी पहुंची। जहां पर अवध के बारातियों का भव्य और हृदय स्पर्शी स्वागत मिथला वासियों ने किया।
        मौका था श्रीराम विवाह पंचमी महामहोत्सव का और स्थान था ब्रज की द्वारा देहरी कहे जाने वाला नगर जिसे वैदिक नाम हाथरस से भी जाना जाता है। जहां अवधपुरी और मिथिलापुरी का एक अनोखा संगम देखने को मिला। नगर के बीचों बीच हनुमान गली स्थित प्राचीन मंदिर श्रीराम दरबार पर अवधपुरी सरीखा माहौल
 स्थापित किया गया जहां बारातियों का साफा बांध कर व शिल्पा हार करा कर भव्य स्वागत किया गया। श्री राम बैंड के साथ विभिन्न झांकियों और चारों दुल्हा सरकारों की घोड़ों पर सवार सवारियां सभी का मन मोह रही थी। बारात शोभा यात्रा आरंभ होते ही नगर के बाजारों में भव्य स्वागतों का क्रम चल पड़ा। कहीं दूध से ,  कहीं खीर से ,  कहीं ठंडी पेय पदार्थ से , कहीं भष्ठान से तो कहीं चाय व कहीं कॉफी से स्वागत का दौर चल पड़ा था। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह देखने लायक थी कि पूरे रास्ता बारात शोभा यात्रा पर नगर के वासियों ने पुष्प वर्षा की झड़ी लगा दी। हर कदम-कदम पर पुष्पों की बारिश से नगर के बाजार खुशनुमा हो चुके थे। भक्ति गीतों और भजनों की मनमोह क धुनों पर पुरुष व महिला श्रद्धालुओं के पैर बरबस  ही धिरकने को मजबूर हो रहे थे। भ्रमणकारी शोभा यात्रा जब तालाब चौराहा स्थित श्री राम दरबार मंदिर पहुंचीतो वहां पर मनोज बूटिया बतौर जनकजी के रूप में मौजूद थे और अपने जन सहयोगियों के साथ बारात शोभा यात्रा का भव्य स्वागत कर रहे थे। इधर, दूसरी ओर मंदिर परिसर में ही कई स्थानों पर भाव और स्वादिष्ट व्यंजनों से भरपूर ज्योनारों का कम चल पड़ा था।ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो त्रेता युग में दशरथ जी जनक जी के यहां अपने चारों सुकुमार को ब्याह में आए हो। शब्दलेखन में वह उत्साह और आकर्षण हम प्रस्तुत नहीं कर सकते जो बतौर माहौल त्रेता युगीन दृष्टतव्य हो रहा था। 
जय सियाराम

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