Posts

दंडौती परिक्रमा में रही लाला और बाबा की धूम

Image
गिर्राज की दंडौती परिक्रमा में भजनों की रही गूंज - बरसाना मंडल ने लगाई दंडौती और गाये भजन - सूर्य ग्रहण की निवृत्ति आज, मंगलाचरण के साथ गूंजे आज मंदिरों के घंटे हाथरस। वर्ष के अंतिम सूर्य ग्रहण 2022 के अवसर पर ब्रज बरसाना यात्रा मंडल के संयोजकत्व में गिर्राज की दंडौती परिक्रमा लगाई गई। गोशाला स्थित दंडौती परिक्रमा के दौरान भजन-कीर्तन का आयोजन भी भक्ति के संचार का एक माध्यम रहा।         बतादें कि सनातन के सानिध्य में धर्म और कर्म के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रहे "ब्रज बरसाना यात्र मंडल" के तत्वावधान में बीते 14 वर्ष से ब्रज धाम यात्रा का  अनवरत संचार हो रहा है। बतादें कि यात्रा के संस्थापक व शिक्षाविद मा.कैलाशचंद्र वार्ष्णेय जी ने बरसाना यात्रा का आरंभ लोगों को धर्म से जोड़कर उनके कर्म को शुद्ध कर मुक्ति के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए करीब 14 वर्ष पूर्व किया था। लगातार चलने वाले धर्म-कर्म के कार्यां के तहत बीती शरद पूर्णिमा को अग्रवाल धर्मशाला में रासोत्सव का आयोजन कराया था। जिस में घर-घर से गोपाल जी पधारे थे। इसी के तहत मंगलवार को स...

रघुवंश का कर्ज कैसे उतारेगा भारत?

Image
*रघुवंश का पूरा भारत ऋणि है ?* -क्योंकि राजा राम रघुवंश में हुए और आज गंगा स्नान भी सभी रघुवंश के कारण ही करते हैं -भागीरथ न होते तो गंगा न होती ब्रजद्वार। कैसे हुआ था माँ गंगा का उद्गम। आइये समझते हैं। विद्वजनों द्वरा डाले गए इस नक्से से माँ गंगा के उद्गम यानी प्रवाह विस्तार को समझसकतेह हैं। पौराणिक  सक्ष्यों को उठाकर देखें तो ऐसा कहा जाता है कि रघुवंश के प्रतापी और तेजस्वी राजाओं में से राजा भागीरथ जी महाराज के कठोर तप से माँ गंगे ने ब्रह्मा जी के कमंडल से निकल कर इस धरा पृथ्वी पर आना स्वीकार किया था, लेकिन माँ गंगा के वेग को पृथ्वी रोक नहीं पाती और पाताल में चली जाती, इसलिए राजा भागीरथ को समझा कर माँ गंगे ने उस बख्तर तो शांत कर दिया, लेकिन राजा भागीरथ ने भी हार नहीं मानी। क्योंकि राजा के पूर्वज और प्रतापी राजा सगर के साठ हाजार पुत्र भस्म पड़े हुऐ थे। राजा सगर के वंश में हर राजा उन पूर्वजों के उद्धानार्थ कठोर तप करते थे, लेकिन सफलता नहीं मिलती थी। *आइये समझते हैं पौराणिक महत्व को* "पौराणिक लेखनी में ही यह वर्णित है कि एक बार ऋषि कपिल मुनि कठोर तप पर थे और...

कलाके कमाल को अंजाम दे रहा है रेखा का परिवार

Image
कलाके कमाल को अंजाम दे रहा है रेखा का परिवार - उदयपुर की माटी से आया यह परिवार माटी की मूर्तियों में भर रहा है आस्था के रंग - कला की इस कमाई से भरण-पोषण ही बमुश्किल होता है : रेखा संजय दीक्षित  हाथरस। कला का कमाल किसी की डिग्री का मुहताज नहीं होता है। यह पेट की आग ही है जो कला को निखारती, संवारती और दौड़ाती है और इसकी गवाही देता है रेखा का परिवार। हजारों किलोमीटर से ब्रज की देहरी कहे जाने वाली हाथरस नगरी में परिवार के साथ पहले गणेश और अब दुर्गा की मूर्तियों को ऐसे सज और संवार रही है मानो बोलने ही वाली हैं।         कला की कद्र भले ही इस जमाने में हो या ना हो, लेकिन कला का कमाल करतब को अंजाम दे रहा है। राजस्थान की राजपूताना माटी से आये रेखा के परिवार ने न जाने कितने घरों में गनपति उत्सव करा दिया और अब शारदीय नवरात्र के नौ दिनों की तैयारी में जुटा है पूरा परिवार। राजस्थान के उदयपुर जिले के गजसम्मा क्षेत्र से आया यह परिवार पिछले कई महा से हाथरस के अलीगढ़ रोड पर पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के सामने टेंट में मिट्टी की बेजान मूर्तियों में जान डाल रहा...

कीर्ति की दुलारी वृषभान की प्यारी फिर जन्मेंगी रावल गांव के गर्भ गृह में

Image
कीर्ति की दुलारी वृषभान की प्यारी फिर जन्मेंगी रावल गांव के गर्भ गृह में -03 सितंबर को छटी तो 04 होगा जन्मोत्सव  -05 को बधाइयों में गूंजेंगे भजनों में शब्द और वाद्यों में यंत्र ब्रजद्वार (हाथरस)। राधा राधा रटत ते सब ब्याधा कट जायें। जी यह सत्य है। आइये इस नाम के प्राकट्य और नाम स्वमिनी के अवतरण कुछ कथा को जानते हैं। रावल गांव स्थित मंदिर श्री राधा रानी जी के सेवायत पुजारी जी के अनुसार, राधा जी का अवतरण गोकुल से करीब आठ किलो मीटर दूर रावल गांव में महा गोप वृषभानु जी महाराज के यहां हुआ था। बताते हैं, की एक पुत्री की प्राप्ति के लिए महाराज भृषभानु की पत्नी रानी कीर्ति प्रति दिन यमुना जी से प्रार्थना किया करती थी। एक दिन रानी कीर्ति सदैव की भांति अपनी सखी और सहेलियों के साथ यमुना स्नान के लिए गई हुई थी तो उन्हें यमुना जी में एक कमल पुष्प दिखा जो काफी प्रकाशवान हो रहा था। उससे निकलने वाली  चमक माहौल को चकाचौंध कर रही थी। कमल पुष्प से निकलने वाले दिव्य प्रकाश के बीच से एक अति सुन्दर और सलौनी बच्ची के उन्हें दर्शन हुए। यह देखकर रानी कीर्ति स्तब्ध और चकित थी। उ...

ललिता और विशाखा सखी चंद्रावलि कौं लूंगी बोल : ललिता जन्मोत्सव

Image
ललिता सप्तमी-राधाष्टमी आवत हैं, ब्रज में बजत बधाई -03 सितंबर को मनाई जायेगी ललिता सप्तमी ब्रजद्वार (हाथरस)। सखी मंडल की प्रमुख और युगल सरकार की अति प्रिय सखी ललिता जी का 03 सितंबर को जन्मोत्सव है। इस दिन को हम ललिता सप्तमी के नाम से जानते हैं। मथुरा जिले में बरसाना के ऊंचागाव में ललिता अटोर नामक पहाड़ी पर ललिता का भव्य मंदिर है। इस मंदिर की जन्मोत्सव परंपरा के अनुसार 2022 में ललिताजी को हुए 5250 वर्ष होने जा रहे हैं।         यह भक्ति के वैभव का ही प्रकाश है कि सखी मंडल की एक वरिष्ठ सखी यानी ललिता जी का जन्मोत्सव 03 सितंबर, 2022 (भाद्र पद शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि) जिसे ललिता सप्तमी भी कहते हैं, को मनाने जा रहे हैं। यह राधा जी से एक दिन बड़ी थीं। ललिता सखी राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की सबसे प्रिय गोपी थी और ललिता सप्तमी जो जन्माष्टमी से 14 दिन बाद और राधाष्टमी से एक दिन पहले पड़ती है, को जन्मोत्सव मनाया जाता है।  भक्तजन इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी के साथ-साथ ललिता देवी की पूजा करते हैं। अष्ट सखी मंडल को ही अष्टसखियों के रूप ...

शिवखोड़ी जहां शिव जी का घर है

Image
शिवखोड़ी जहां शिव जी का घर है - भस्मासुर से बचने के लिए शिव जी परिवार सहित रहे थे शिवखोड़ी में - शिवखोड़ी का एक छोर खुलता है अमरनाथ गुफा में - जो शिवखोड़ी आता है वह शिवजी की कृपा पाता है प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। जिस प्रत्यक्ष से हम आपकी मुलाकात कराने जा रहे हैं वही सत्य है। यानी हम बात कर रहे हैं शिव की। क्योंकि शिव ही सत्य है और इस सत्य का एक रुप देखने को मिलता है शिवखोड़ी में।  शिवालिक पर्वत की श्रृंखलाओं में स्थित शिवखोड़ी, जहां प्रकृति-निर्मित शिवलिंग और अन्य दुर्लभ प्रतिमाएं स्थापित हैं। कहा जाता है यह प्राकृतिक गुफ़ा हर शिवभक्त के लिए बहुत मायने रखती हैं। जम्मू-कश्मीर राज्य के जम्मू से कुछ दूरी पर स्थित है रयासी। जहां भगवान शिव का घर कही जानेवाली शिवखोड़ी गुफा स्थित है। इससे जुड़ी सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसी गुफा का दूसरा छोर अमरनाथ गुफा में खुलता है। यही कारण है कि शिवखोड़ी शिव भक्तों की आस्था का केंद्र बिंदु माना जाता है। 🌹आइये जानते इससे जुड़ा वृतांत🌹 वृतांत है ! हजारों पहले पहले सतयुग का। भक्तों से प्रसन्न ह...

बंधन मुक्त कर आनंद की अनुभूति करा मनोवांछित फल प्रदान करती हैं माँ

Image
बंधन मुक्त कर आनंद की अनुभूति करा मनोवांछित फल प्रदान करती हैं माँ - 15 वे वर्ष की पांच वी यात्रा पहुची मां के दरबार  - इस अवसर पर जमकर भजन-कीर्तन में भक्ति के रस में झूमें भक्त  हाथरस/मथुरा। जिसके यहां संतान सुख नहीं है, जो दीन-हीन है, वैभव संपन्न जीवन का आकांक्षी है, जिसको सत्रुओं से कष्ट है या फिर कार्यों में सफलता नहीं मिलती तो वह ब्रज की कुल देवी बंदी, आनंदी और मनोवांञ्छा देवी की शरण में आता है तो सर्वगुण संपन्नता पाता है।          यह उद्गार पं. योगेश्वर महाशय जी महाराज ने ब्रज की द्वार देहरी से पहुंची ब्रज बरसाना यात्रा मंडल की वर्ष 2022 की पांच यात्रा के मौके पर बतौर मंदिर की महिमा का बखान करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने बताया कि मां बंदी देवी सभी को बंदन मुक्त करती हैं  । अर्थात आपका कोई नहीं बन रहा है शुरू करते कार्य में अड़चने आजाती हैं तो उस भक्त को मां बंदी असफलता के बंदनों से मुक्त कर देती हैं। इन्होंने ही श्री कृष्ण की प्रार्थना पर मां देवकी और बाबा वसुदे को बंदन मुक्त किया था। इसके बाद ही बाबा वसुदेव ने लाला क...